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2026-07-31

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय ने चैट जीपीटी से सामूहिक नकल पर निजी कॉलेज के परिणाम रोके

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, सागर।

डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें छिंदवाड़ा के सौंसर स्थित एक निजी कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा चैट जीपीटी का उपयोग करके सामूहिक नकल की गई। यह मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने कॉलेज के सभी परीक्षा परिणामों पर रोक लगा दी है और मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, मई माह में डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 17 महाविद्यालयों में दूसरे, चौथे और छठवें सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। केंद्रीय मूल्यांकन प्रणाली के तहत सभी उत्तर पुस्तिकाएं जांच के लिए सागर विश्वविद्यालय भेजी गई थीं। इस दौरान अर्थशास्त्र विषय की एक उत्तर पुस्तिका की जांच करते समय एक शिक्षक को उत्तर के अंत में “पूरे उत्तर का वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें” लिखा मिला, जिससे शिक्षक हैरान रह गए। उन्होंने तत्काल परीक्षा नियंत्रक को इसकी सूचना दी। इसके बाद जब उसी कॉलेज की अन्य उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई, तो यह सामने आया कि अधिकांश छात्रों ने लगभग एक जैसे उत्तर लिखे थे। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि उत्तर चैट जीपीटी से कॉपी किए गए थे। यह मामला केवल एक विषय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रारंभिक जांच में तीन अन्य विषयों में भी इसी तरह की सामूहिक नकल के संकेत मिले हैं।

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विश्वविद्यालय की कार्रवाई

विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छिंदवाड़ा के सतपुड़ा कॉलेज ऑफ इंफॉर्मेशन एंड बायोटेक्नोलॉजी के सभी परीक्षा परिणाम रोक दिए हैं। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय और अन्य संबद्ध महाविद्यालयों के परिणाम पहले ही जारी किए जा चुके हैं। सामूहिक नकल के इस मामले में कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी किया जा रहा है। इस संबंध में एक समिति का गठन किया गया है, जो मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोबारा परीक्षा कराने, परीक्षा केंद्र बदलने या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल ने बताया कि जांच के बाद ऐसे विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा, जो नकल प्रकरण में दोषी नहीं पाए जाएंगे। डॉ. जायसवाल ने यह भी बताया कि आगामी सत्र से उस कॉलेज में परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, बल्कि उन्हें दूसरे सरकारी कॉलेज में कराया जाएगा।