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2026-07-25

सिंधिया राजघराने के 40 हजार करोड़ संपत्ति विवाद में ‘द कोवेनेंट’ दस्तावेज अहम

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

मध्य भारत (जो बाद में मध्य प्रदेश बना) के गठन से संबंधित 78 साल पुराना ‘द कोवेनेंट’ (अनुबंध पत्र) दस्तावेज सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद के मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में शामिल किया गया है। यह स्वतंत्रता के पश्चात भारत के एकीकरण और रियासतों के विलय से जुड़ा एक अहम दस्तावेज है।

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भारत सरकार और तत्कालीन मध्य भारत सरकार के मध्य 13 अगस्त, 1948 को हुए इस अनुबंध में राजा की निजी और सरकारी संपत्तियों का पृथक्करण किया गया था। निजी संपत्तियों में ग्वालियर का भव्य जय विलास पैलेस, साख्या विलास, सुसेरा कोठी, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस और जॉर्ज कैसल कोठी शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, दिल्ली की ‘दिल्ली कोठी’ (राजपुर रोड) और पुणे का ‘पद्मा विलास’ भी महाराजा की निजी संपत्ति के तौर पर माने गए।

जानकारों के अनुसार, यह दस्तावेज प्रस्तावित समझौते में एक अहम भूमिका निभाएगा।

सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति के बंटवारे से संबंधित मामला ग्वालियर की जिला अदालत में विचाराधीन है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित है।

संपत्तियों को लेकर वर्षों से जारी विवाद के समाधान में एक नई जटिलता उत्पन्न हो गई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सहित परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा विभिन्न अदालतों में प्रस्तुत ‘फैमिली सेटलमेंट’ के बीच अब ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ, स्वर्गीय पद्माराजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी ने अदालत में एक कैविएट दाखिल की है।

प्रतिमा देवी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रस्तावित समझौते से उनके वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, अतः उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतिम आदेश पारित न किया जाए।

पद्माराजे सिंधिया की पुत्रियां

त्रिपुरा राजघराने में विवाहित पद्माराजे सिंधिया अपने पीछे दो पुत्रियां छोड़ गई थीं। हाल के वर्षों में सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद में उनकी दोनों पुत्रियां अपनी मां की कानूनी उत्तराधिकारी के तौर पर पक्षकार रही हैं।

उनकी पहली पुत्री प्रतिमा देवी का विवाह नेपाल के प्रसिद्ध राणा परिवार के डॉ. धवल शमशेर राणा से हुआ है। उन्होंने सिंधिया संपत्ति विवाद में अपनी दिवंगत मां पद्माराजे के हिस्से पर उत्तराधिकार का दावा किया है।

दूसरी पुत्री राजकुमारी रमा राजे भी पद्माराजे की कानूनी उत्तराधिकारी हैं। ग्वालियर की संपत्ति से संबंधित मामलों में उन्होंने भी अपनी मां के अधिकारों के आधार पर दावा प्रस्तुत किया है।

‘द कोवेनेंट’ में भत्ते और संपत्तियों का ब्यौरा

वर्ष 1948 में ग्वालियर, इंदौर और मध्य भारत की अन्य रियासतों के राजाओं के मध्य हुए विलय के मूल समझौते (‘द कोवेनेंट’) की प्रतिलिपि को दिल्ली के नोटरी (भारत सरकार) द्वारा ‘सर्टिफाइड ट्रू कॉपी’ के रूप में प्रमाणित किया गया है। इस ऐतिहासिक दस्तावेज में तत्कालीन रियासतों के राजाओं को प्राप्त होने वाले भत्ते (प्रिवी पर्स) और ग्वालियर राजघराने की अरबों रुपये की निजी संपत्तियों का संपूर्ण ब्यौरा दर्ज है।

राजाओं के भत्ते कर-मुक्त थे, जो उन्हें सालाना प्राप्त होते थे।

इनमें महाराजा जे.एम. सिंधिया को सर्वाधिक 25 लाख रुपये, महाराजा यशवंतराव होल्कर को 15 लाख रुपये, महाराजा ए.आर. पवार को 2 लाख 90 हजार रुपये, देवास सीनियर को 1 लाख 45 हजार रुपये और देवास जूनियर को 1 लाख 80 हजार रुपये प्राप्त होते थे। मठवार रियासत के राजा को 6 हजार रुपये का भत्ता मिलता था।