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2026-08-14

तमिलनाडु विधानसभा में राज्य गीत ‘तमिल थाई वाजथु’ अनिवार्य करने का प्रस्ताव पारित

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच,।

तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को राज्य गीत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) के साथ कांग्रेस पार्टी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने यह प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में राज्य के शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में होने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत से पहले राज्य गीत ‘तमिल थाई वाजथु’ को औपचारिक रूप से अनिवार्य करने की बात कही गई है।

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मुख्यमंत्री का संबोधन

प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि राज्य में ‘तमिल थाई वाजथु’ को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, “तमिल का मतलब गर्व है, तमिल का मतलब शक्ति है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “जैसे ही आप ‘तमिल’ कहते हैं, पूरा तमिलनाडु एकजुट हो जाता है।” उन्होंने जोर दिया कि ‘तमिल थाई वाजथु’ को तमिलनाडु में पहला स्थान मिलना चाहिए और इसे पहला स्थान देना राज्य का अधिकार है।

विजय ने एक भावुक संबोधन में कहा कि तमिल सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि “हमारी जिंदगी और भावना भी है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मातृभाषा उतनी ही पवित्र है, जितनी किसी की मां।

उन्होंने विधानसभा के सदस्यों से प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) राज्य गीत के सम्मान की रक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, “तमिल थाई वाजथु के सम्मान की रक्षा के मामले में टीवीके सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘तमिल थाई वाजथु’ को सबसे पहले गाया जाना चाहिए, यह कहना राजनीतिक बहस का विषय नहीं बनना चाहिए।

उन्होंने सभी सदस्यों से पार्टी के मतभेदों को अलग रखते हुए एकजुट होकर इस प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया।

प्रस्ताव में निहित ऐतिहासिक तथ्य

प्रस्ताव में कहा गया है कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी शास्त्रीय भाषाओं में से एक है और तमिल सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है।

‘तमिल थाई वाजथु’ को 1891 में मनोनमनियम सुंदरनार द्वारा लिखे गए नाटक ‘मनोनमनियम’ में मां तमिल की स्तुति के रूप में शामिल किया गया है।

23 नवंबर 1970 को जारी एक सरकारी आदेश के माध्यम से इसे सरकारी कार्यक्रमों में सबसे पहले गाने की व्यवस्था लागू की गई थी।

प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि 12 दिसंबर 2021 से ‘तमिल थाई वाजथु’ को आधिकारिक तौर पर राज्य गीत का दर्जा दिया गया।

इसके बाद, तमिलनाडु के शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में होने वाले कार्यक्रमों से पहले इसे गाना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया गया।

केंद्रीय एडवाइजरी की पृष्ठभूमि

यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया एडवाइजरी की पृष्ठभूमि में आया है। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 28 जनवरी के अपने निर्देश का ‘सख्ती से पालन’ करने को कहा था।

इस निर्देश में आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् बजाने की बात कही गई थी।