बुलंद सोच, भोपाल।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने उज्जैन के सप्तसागरों की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अधिकरण ने पाया कि गोवर्धन सागर, विष्णु सागर, पुरुषोत्तम सागर, क्षीर सागर, रुद्र सागर और पुष्कर सागर का पानी ‘डी’ श्रेणी का है, जो स्नान के लिए भी उपयुक्त नहीं है।
इसके बावजूद, श्रद्धालु और पर्यटक इन्हीं प्रदूषित जलाशयों के पानी से धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। ट्रिब्यूनल ने इस स्थिति को श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और धार्मिक आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ करार दिया।
एनजीटी ने उज्जैन नगर निगम आयुक्त और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
अधिकरण ने प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने तथा उनसे पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने का भी आदेश दिया है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए, जल गुणवत्ता में सुधार के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हुए 30 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

