बुलंद सोच, सीहोर।

सीहोर जिले में मंगलवार को हुई झमाझम बारिश ने मानसून की रफ्तार को नई गति प्रदान की है। इस अच्छी वर्षा से खेतों और जलाशयों को राहत मिली है, साथ ही जिले के वर्षा आंकड़ों की तस्वीर भी बदल गई है।
अब तक सामान्य से पीछे चल रहा जिला एक ही दिन की बारिश के बाद पिछले वर्ष के आंकड़ों के बेहद करीब पहुंच गया है। 22 जुलाई 2026 तक जिले में औसतन 431.4 मिलीमीटर (करीब 17 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 451.1 मिलीमीटर (करीब 17.8 इंच) था। वर्तमान में केवल 19.7 मिलीमीटर (करीब 0.8 इंच) की कमी रह गई है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि यदि अगले दो-तीन दिनों तक बारिश का यही सिलसिला जारी रहा, तो जिला जल्द ही पिछले वर्ष के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा।
पिछले 24 घंटों में जिले में औसतन 56.8 मिलीमीटर (करीब 2.2 इंच) वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान बुधनी में सर्वाधिक 114 मिलीमीटर (करीब 4.5 इंच) वर्षा रिकॉर्ड हुई। इसके अतिरिक्त, रेहटी में 84.2 मिमी, भैरूंदा में 68 मिमी, इछावर में 65 मिमी, श्यामपुर में 52.5 मिमी, सीहोर में 35 मिमी, आष्टा में 20 मिमी तथा जावर में 16 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
लगातार बारिश के कारण कई नदी-नाले उफान पर पहुंच गए हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बनी हुई है।
वर्षा के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आष्टा, जावर और इछावर इस वर्ष वर्षा के मामले में पिछले साल से आगे निकल चुके हैं। आष्टा में अब तक 522 मिमी (20.6 इंच), जावर में 470 मिमी (18.5 इंच) और इछावर में 443 मिमी (17.4 इंच) वर्षा दर्ज की गई है।
वहीं, सीहोर, श्यामपुर, भैरूंदा, बुधनी और रेहटी में अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कमी बनी हुई है, हालांकि मंगलवार की बारिश के बाद यह अंतर काफी कम हो गया है।
आरएके कॉलेज के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एस. के. तोमर के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और मध्य भारत में सक्रिय मानसूनी प्रणाली के कारण प्रदेश में वर्षा गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। इसके प्रभाव से सीहोर जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में अगले 48 घंटे तक मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक, तेज बौछारों और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।
लगातार बारिश से नदी-नालों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। प्रशासन ने बारिश के दौरान उफनते नदी-नालों को पार नहीं करने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा खराब मौसम में सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। किसानों से भी मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर कृषि कार्य करने और अनावश्यक जोखिम से बचने का आग्रह किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर हुई यह बारिश खरीफ फसलों, विशेषकर सोयाबीन और मक्का के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी। साथ ही, तालाबों, बांधों और अन्य जलस्रोतों में पानी की आवक बढ़ने से पेयजल और सिंचाई की स्थिति भी बेहतर होने की उम्मीद है। यदि आगामी दिनों में मानसून इसी तरह सक्रिय रहा, तो जिले में सामान्य से बेहतर वर्षा का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
