बुलंद सोच, बैतूल।

बैतूल जिला अस्पताल में मरीजों के स्वजन को रात में ठहरने की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से 84.98 लाख रुपए की अनुमानित लागत से 30 बिस्तरों का एक विश्रामालय तैयार किया गया है। यह विश्रामालय अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इस भवन का लोकार्पण मई माह में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके सहित जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया था, परंतु लगभग तीन महीने बीत जाने के बाद भी इसके मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ है। लोकार्पण के समय इसे जिला अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके स्वजन के लिए एक उपयोगी सुविधा बताया गया था, हालांकि लोकार्पण के बाद भी इसमें ठहरने की सुविधा प्रारंभ नहीं हो सकी है।
संचालन और प्रबंधन में अस्पष्टता
विश्रामालय के संचालन को लेकर प्रक्रिया अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। इसे कौन संचालित करेगा, इसकी जिम्मेदारी किस संस्था या अधिकारी की होगी और मरीजों के स्वजन को यहां ठहराने के लिए क्या नियम होंगे, इन बिंदुओं पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। दूरदराज से इलाज के लिए आने वाले मरीजों के स्वजन को ठहरने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार मरीजों को एक से अधिक दिन अस्पताल में रहना पड़ता है और उनके साथ आए स्वजन के सामने रात में ठहरने की समस्या खड़ी हो जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार निजी होटल या लाज में कमरा लेने में असमर्थ होते हैं, जिसके कारण कई लोग अस्पताल परिसर के बरामदों या फर्श पर रात बिताने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. रानू वर्मा ने बताया कि विश्रामालय के संचालन के संबंध में अभी तक स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इस मामले में कलेक्टर से मार्गदर्शन मांगा गया है।

