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2026-07-29

भोजशाला विवाद: नमाज के लिए दो नए वैकल्पिक स्थल तैयार, मस्जिद पक्ष की निकटता शर्त

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, धार।

धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद के संदर्भ में, जिला प्रशासन ने नमाज के लिए दो नए वैकल्पिक स्थान तैयार करना शुरू कर दिए हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था के तहत पहले तैयार किए गए 40 पीर (मालीवाड़ा) स्थल को मस्जिद पक्ष द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद उठाया गया है।

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दोनों नए स्थल भोजशाला से लगभग 500 मीटर दूर हैं, जबकि पहले प्रस्तावित 40 पीर स्थल की दूरी लगभग 900 मीटर थी। इनमें से एक स्थान एक बंद पड़ी डिस्टिलरी इकाई के पास और दूसरा समीप स्थित वन विभाग की भूमि पर विकसित किया जा रहा है।

हालांकि, मस्जिद पक्ष का कहना है कि यदि ये नए स्थान भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश में उल्लिखित ‘भोजशाला के निकट’ की कसौटी पर खरे नहीं उतरे तो वहां भी नमाज अदा नहीं की जाएगी।

अब सभी की निगाहें 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। मामले में मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के 15 मई के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई को हुई सुनवाई में अंतरिम व्यवस्था के तहत प्रशासन को प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे के बीच भोजशाला के निकट नमाज के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रशासन ने सबसे पहले भोजशाला से लगभग 900 मीटर दूर स्थित 40 पीर स्थल पर नमाज की व्यवस्था की थी। वहां साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई थीं।

लेकिन मस्जिद समाज ने इस स्थल को भोजशाला के पर्याप्त निकट नहीं मानते हुए वहां नमाज अदा नहीं की। इसके परिणामस्वरूप, 18 और 25 जुलाई, दोनों शुक्रवार बिना नमाज के बीत गए।

तहसीलदार दिनेश उईके ने बताया कि दोनों नए स्थानों पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उन्होंने कहा, “व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों को दोनों स्थलों का निरीक्षण कराया जाएगा और उनकी राय ली जाएगी।” उईके के अनुसार, रविवार को इस संबंध में समाज के प्रतिनिधियों से प्रारंभिक चर्चा भी हुई है।

कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन नए विकल्प तैयार कर रहा है, लेकिन समाज का रुख नहीं बदला है। उन्होंने स्पष्ट किया, “नमाज केवल उसी स्थान पर अदा की जाएगी, जिसे भोजशाला के पर्याप्त निकट माना जा सके।” समद ने आगे कहा, “यदि नए दोनों विकल्प भी इस कसौटी पर खरे नहीं उतरे तो वहां भी नमाज नहीं पढ़ी जाएगी।” उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अभी तक प्रशासन ने दोनों नए स्थलों की पूरी जानकारी समाज को उपलब्ध नहीं कराई है।