बुलंद सोच, भोपाल।
किसानों के आंदोलन के बाद राज्य सरकार द्वारा मूंग खरीदी का दायरा 25% से बढ़ाकर 60% किए जाने का असर अब मंडियों में दिखाई देने लगा है। सरकार के इस निर्णय के बाद भोपाल की करोंद मंडी में मूंग की आवक अचानक घट गई है। गुरुवार को मंडी में महज 25 क्विंटल मूंग की आवक दर्ज हुई, जबकि बुधवार को यह 167 क्विंटल थी। यानी एक ही दिन में आवक में लगभग 85% की गिरावट दर्ज की गई। माना जा रहा है कि किसान अब बढ़ी हुई सरकारी खरीदी का लाभ लेने के लिए फिलहाल अपनी फसल रोक रहे हैं। आवक घटने के साथ ही बाजार में मूंग के भाव में भी तेजी देखने को मिली। गुरुवार को करोंद मंडी में मूंग की नीलामी 5600 से 6800 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर हुई। बुधवार को यह 5252 से 6300 रुपए प्रति क्विंटल के बीच रही थी। यानी एक दिन में अधिकतम भाव में लगभग 8% और न्यूनतम भाव में लगभग 7% तक की बढ़ोतरी दर्ज हुई। व्यापारियों का कहना है कि सरकार द्वारा खरीदी का दायरा बढ़ाने की घोषणा के बाद किसान फिलहाल अपनी उपज मंडियों में नहीं ला रहे हैं। पहले एक एकड़ में लगभग सवा क्विंटल मूंग की सरकारी खरीदी होती थी, जिसे बढ़ाकर अब प्रति एकड़ लगभग 3 क्विंटल कर दिया गया है। ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि पहले की तुलना में अधिक मात्रा में समर्थन मूल्य पर फसल बेचने का अवसर मिलेगा। इसी वजह से वे फिलहाल बिक्री टाल रहे हैं, जिसका सीधा असर बाजार भाव पर भी दिखाई दे रहा है।
खुदरा बाजार पर संभावित असर
करोंद मंडी व्यापारी संघ के प्रवक्ता संजीव जैन ने बताया कि सरकार के फैसले का असर मंडियों में साफ दिखाई देने लगा है। आवक घटने से भाव बढ़ गए हैं। आने वाले दिनों में इसका असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। मंडियों से बड़ी मात्रा में मूंग दाल मिलों में जाती है और वहीं से प्रोसेस होकर खुदरा बाजार तक पहुंचती है। ऐसे में यदि आवक कम रही तो मूंग दाल के दाम भी बढ़ सकते हैं। भोपाल से मूंग कर्नाटक, दिल्ली, इंदौर, कटनी और पिपरिया की दाल मिलों में भेजी जाती है। राज्य सरकार इस समय 8768 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मूंग खरीद रही है, जबकि करोंद मंडी में गुरुवार को इसका भाव 5600 से 6800 रुपए प्रति क्विंटल रहा।
मंडियों को ई-नाम से जोड़ने की पहल
मध्य प्रदेश की कृषि उपज मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय मंजूरी समिति (एसएलएससी) का गठन किया है। कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित यह समिति प्रदेश की मंडियों को ई-नाम पोर्टल पर लाने से जुड़े विस्तृत प्रस्तावों को मंजूरी देकर केंद्र सरकार को भेजेगी। इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया है कि अब केवल सरकारी मंडियां ही नहीं, बल्कि निजी मंडी प्रांगण, निजी खरीदी/संग्रहण केंद्र (साइलो/वेयरहाउस) और डीम्ड मंडियां भी ई-नाम पोर्टल का उपयोग करने के लिए समिति के समक्ष प्रस्ताव रख सकेंगी। किसानों को वन नेशन वन मार्केट की सुविधा मिल सकेगी। यानी वे अपनी उपज केवल स्थानीय मंडियों के व्यापारियों को बेचने के लिए बाध्य नहीं होंगे। ई-नाम पोर्टल के माध्यम से देश भर के व्यापारी बोली लगा सकेंगे, जिससे किसान फसल का बेहतर दाम चुन सकेंगे।

