बुलंद सोच, खंडवा।
खंडवा स्थित श्रीधूनीवाले दादाजी दरबार में गुरु पूर्णिमा 2026 के अवसर पर 28 से 30 जुलाई तक लगभग चार लाख श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। इन श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए शहरभर में 200 से अधिक भंडारे आयोजित किए जाएंगे।
इन भंडारों में सुबह पोहा-जलेबी से लेकर मालपुआ, दाल-बाटी, खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी और अन्य प्रसाद नि:शुल्क परोसा जाएगा। दादाजी के भक्त इस सेवा परंपरा को ‘देने वाले दादाजी, पाने वाले भी दादाजी’ कहकर संबोधित करते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर खंडवा के गली-मोहल्ले और प्रमुख चौराहे सेवा केंद्रों में परिवर्तित हो जाएंगे। सामाजिक, धार्मिक और व्यापारी संगठन श्रद्धालुओं की अगवानी में सक्रिय रहेंगे। भोजन परोसने, पेयजल उपलब्ध कराने, चिकित्सा सहायता, विश्राम व्यवस्था और यातायात प्रबंधन तक हजारों स्वयंसेवक अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएंगे। इस सेवा परंपरा में बुजुर्गों के साथ-साथ युवा और बच्चे भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।
इस वर्ष के महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण निर्माणाधीन संगमरमर का भव्य मंदिर भी रहेगा। लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस मंदिर के लिए राजस्थान के मकराना से मंगाए गए संगमरमर के नमूना स्तंभ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखे गए हैं।
मंदिर निर्माण कार्य के कारण दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। श्रद्धालु समाधि स्थल तक पहुँचने के लिए अस्थायी पुल और रैंप का उपयोग करेंगे।
सेवा की यह परंपरा वर्ष 1930 से जुड़ी है, जब बड़े दादाजी (श्रीकेशवानंद महाराज) ने खंडवा में समाधि ली थी। बताया जाता है कि नर्मदा परिक्रमा के दौरान वे दो दिन तक खंडवा में रुके थे।
उस समय उनके साथ आए श्रद्धालुओं के जत्थों के लिए शहरवासियों ने भंडारे का आयोजन किया था। यह परंपरा अब एक जन-उत्सव में बदल चुकी है, जिसमें पूरा शहर सेवा को सबसे बड़ी साधना मानकर सहभागी बनता है।
वर्तमान में शहर में 200 से अधिक भंडारे जगह-जगह आयोजित होते हैं। इसके अतिरिक्त, कई संस्थाएँ दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं को नि:शुल्क चिकित्सा, ठहरने की सुविधा और परिवहन के साधन भी उपलब्ध कराती हैं।

