बुलंद सोच, ग्वालियर।

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डबरा में अवैध खनन और खनिज परिवहन की शिकायतों से जुड़े मामले में शासन से अवैध खनन के परिवहन को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों पर सवाल किए। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जगह-जगह सीसीटीवी कैमरों की सतत निगरानी की व्यवस्था की जा रही है, जिससे ट्रक जहां से भी पास होगा पता चल जाएगा। न्यायालय ने बड़े अक्षरों में ट्रक का नंबर अंकित करने के सुझाव पर पूछा कि अगर ट्रक चालक ने नंबर प्लेट बदल ली तो उस स्थिति में कैसे पकड़ेंगे। इस पर शासन ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
न्यायालय का सुझाव
न्यायालय ने सुझाव देते हुए कहा कि जो ट्रक यहां परिवहन में उपयोग हो रहे हैं, उनकी बॉडी और कांच पर बड़े अक्षरों में ट्रक का नंबर अंकित किया जा सकता है।
नए माइनिंग अधिकारी और आगामी सुनवाई
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने नए माइनिंग आफिसर से जुड़ा एक आवेदन भी कोर्ट में पेश किया। बताया जा रहा है कि इस नए अधिकारी को लेकर कई गंभीर सवाल किए गए हैं। नए माइनिंग अधिकारी अपना पक्ष अगली सुनवाई में रखेंगे। इस मामले में अगली सुनवाई मंगलवार को सुबह साढ़े नौ बजे होगी, जिसमें जिला कलेक्टर को मौजूद रहना होगा। इस दौरान खदानों के ड्रोन निरीक्षण की जो फुटेज न्यायालय में सौंपी गई है, उसे देखा जाएगा।
अन्य विभागों को जोड़ा
हाई कोर्ट ने इस मामले में ग्वालियर चंबल संभाग के पांच जिलों के आरटीओ अधिकारियों, भोपाल के ईओडब्ल्यू और भोपाल के लोकायुक्त विभाग को भी जोड़ा है।
अशोक यादव की खदानों पर कार्रवाई
बीती सुनवाई पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए अशोक सिंह यादव की जफरपुर-बिलौआ स्थित तीसरी खदान में भी एक सप्ताह के लिए खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने इस दौरान ब्लास्टिंग, खुदाई और पहले से निकाले गए खनिज के परिवहन को भी रोक दिया था। बीती सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साइट कार्यालय से मूल रिकार्ड हटाए जाने को गंभीरता से लिया। अशोक सिंह यादव की ओर से पेश किए गए रजिस्टर में प्लांट का विवरण नहीं था। कोर्ट के सवालों पर बताया गया कि रजिस्टर शहर के थाटीपुर स्थित कार्यालय में तैयार किया जाता है और लोडिंग रसीदों के आधार पर जानकारी दर्ज की जाती है। कोर्ट ने कहा कि अब तक यह रिकार्ड पेश नहीं किया गया है कि वास्तव में कितना खनिज निकाला गया। साथ ही 16 जुलाई के आदेश से जिन दो खदानों में खनन पर रोक लगाई गई थी, उनका रिकार्ड भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने अशोक सिंह यादव के रिकार्ड छिपाने पर गंभीर सवाल उठाए।
कलेक्टर को निर्देश और भविष्य की रणनीति
हाईकोर्ट ने कलेक्टर ग्वालियर को आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन और परिवहन की रोकथाम के लिए एक सप्ताह के भीतर प्रभावी दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे और 17 अगस्त से खनन शुरू करने की अनुमति पर भी विचार होगा।

