बुलंद सोच, ग्वालियर।
ग्वालियर जिले में 6500 से अधिक शिक्षकों का वेतन महीने की 30 या 31 तारीख को मिल जाता है, लेकिन इस बार वेतन चार दिन बाद भी उनके खातों में नहीं पहुंचा है।
अभी अगले दो से तीन दिन तक वेतन उनके खाते में पहुंचने की उम्मीद नहीं है। यह स्थिति केवल ग्वालियर जिले की नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसी ही स्थिति है।
वेतन अटकने की मुख्य वजह यह है कि कई शिक्षकों की नेटवर्क या अन्य कारणों से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाई है। इन शिक्षकों के आवेदनों पर ब्लॉक स्तर पर गठित समितियां जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही ब्लॉक के सभी शिक्षकों का वेतन पत्रक बनेगा और उन्हें वेतन मिल पाएगा।
लोक शिक्षण विभाग ने ई-अटेंडेंस को लेकर एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि यदि किसी शिक्षक की ई-अटेंडेंस नहीं लगी है और उसे उस दिन का वेतन दिया जाता है, तो संबंधित प्राचार्यों और ब्लॉक अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस आदेश के कारण, प्रत्येक ब्लॉक में कई ऐसे शिक्षक हैं जिनकी महीने भर में शत-प्रतिशत ई-अटेंडेंस नहीं है। ऐसे शिक्षकों ने अपना पूरा वेतन प्राप्त करने के लिए संबंधित संकुल प्राचार्यों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को आवेदन दिए हैं।
जबलपुर हाई कोर्ट ने 12 जुलाई को ई-अटेंडेंस के संबंध में आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि यदि नेटवर्क या तकनीकी खामी के कारण किसी शिक्षक की ई-अटेंडेंस नहीं लग पाई है और उसने उसी दिन संबंधित अधिकारी को इसकी सूचना दी है, तो उनसे आवेदन लेकर जांच के बाद उनका पूरा वेतन दिया जाए।
हाई कोर्ट के इस निर्णय का पालन करने और लोक शिक्षण विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों ने एक रास्ता निकाला है। उन्होंने हर ब्लॉक में एक समिति का गठन किया है।
यह समिति शिक्षकों के उन आवेदनों की जांच कर रही है, जिनमें उन्होंने ई-अटेंडेंस न लग पाने के कारण बताए हैं। समिति की जांच के बाद ही यह फैसला हो पाएगा कि शिक्षकों का वेतन कटेगा या नहीं। इस व्यवस्था से समिति का निर्णय किसी एक अधिकारी का नहीं होगा और यदि कहीं गलती होती है, तो अधिकारियों पर आंच नहीं आएगी।
अधिकतर शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस न लगने के दो मुख्य कारण बताए हैं। उनके आवेदनों के अनुसार, एक कारण स्कूल के आसपास इंटरनेट नेटवर्क में परेशानी है, और दूसरा यह कि ऐप ने ठीक से काम नहीं किया या ऐप ने उन्हें स्कूल से काफी दूर बताया।
जिला शिक्षा कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 95 प्रतिशत से अधिक शिक्षक और 99 प्रतिशत स्कूल प्रभारी ई-अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं, जबकि पिछले साल स्थिति ऐसी नहीं थी। हालांकि, पिछले दिनों संस्था से ही लॉग आउट करने के मामलों में शिक्षक अभी भी पीछे हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी स्वीटी मंगल ने बताया कि हर ब्लॉक में एक समिति बनाई गई है जो ई-अटेंडेंस से संबंधित आवेदनों की जांच कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही शिक्षकों का वेतन उनके खातों में पहुंच जाएगा।

