बुलंद सोच,।
एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसकी 10 माह की मासूम बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया।
दमोह निवासी पीड़िता ने याचिका में कहा कि वह नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता थी। दुष्कर्म के कारण गर्भवती होने पर उसने लगभग 10 माह पहले दमोह जिला अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया था।
अकेली होने के कारण महिला अपने और बच्ची के पालन-पोषण के लिए एक किन्नर के घर में काम करने लगी। इसी दौरान, दूसरे किन्नर समूह ने बच्ची को बेचने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद पुलिस ने बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति, दमोह के सुपुर्द कर दिया। याचिकाकर्ता ने बच्ची को वापस पाने के लिए बाल कल्याण समिति से संपर्क किया।
समिति ने बच्ची के जन्म से संबंधित दस्तावेज मांगे, जिस पर महिला ने जन्म प्रमाण-पत्र और जिला अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज टिकट प्रस्तुत किए। इसके बावजूद, बाल कल्याण समिति ने बच्ची को सौंपने से इनकार कर दिया, जिसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट के जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महिला को अगली सुनवाई तक प्रतिदिन दो घंटे बच्ची से मिलने की अनुमति प्रदान की है। यह मुलाकात पुलिस की मौजूदगी में होगी।
सरकार की ओर से बताया गया कि बाल कल्याण समिति ने याचिकाकर्ता के बच्ची की मां होने पर संदेह व्यक्त किया है। सरकार का कहना था कि ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि याचिकाकर्ता ही बच्ची की जैविक मां है।
हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज शासकीय हैं, इसलिए सरकार ने उनकी जांच के लिए समय देने का आग्रह किया था।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अपनी बच्ची से मिलने की अनुमति दी जाए। बच्ची की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, यह मुलाकात सागर महिला थाने में पदस्थ महिला आरक्षक की मौजूदगी में कराई जाएगी।
न्यायालय ने सागर पुलिस अधीक्षक को महिला आरक्षक नामित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, दमोह पुलिस अधीक्षक को बाल कल्याण समिति को पूरा सहयोग उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर कर्मचारी भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही, सरकार को निर्देशित किया गया है कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की तीन दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए।
मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित की गई है।
