बुलंद सोच, इंदौर।
गांधी नगर थाना क्षेत्र के दिलीप नगर में शुक्रवार को एक सड़क हादसे में तीन वर्षीय बच्चे शिवांश की मौत हो गई। वह अपनी मां मोना के पास कार की आगे की सीट पर खड़ा था।
यह हादसा आदिनाथ ग्रीन कॉलोनी के समीप तब हुआ जब स्पीड ब्रेकर पर आगे चल रही एक सफेद रंग की कार (एमपी-09-सीवी-5019) ने अचानक ब्रेक लगा दिए। पीछे चल रही कार (एमपी-09-बीयू-6030) उससे टकरा गई, जिसमें शिवांश सवार था।
टक्कर इतनी तेज थी कि शिवांश उछलकर कार के डैशबोर्ड से जा टकराया। उसके सिर और मुंह पर गंभीर चोटें आईं और वह बेहोश हो गया। परिजन उसे तत्काल एक निजी अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के एयरबैग भी खुल गए। आशंका जताई जा रही है कि एयरबैग खुलने से भी बच्चे को चोट लगी होगी, जिससे उसकी जान चली गई। कार में सवार शिवांश की नानी बिलमबाई और प्रेमबाई भी अचानक ब्रेक लगने से सीट से टकराकर घायल हो गईं, जबकि मोना घटना के बाद बेहोश हो गईं।
बिंजाना निवासी सतीश राठौर (शिवांश के पिता) अपनी पत्नी मोना के साथ रिश्तेदार की तेरहवीं में शामिल होने के लिए खेड़ी सिहोद (मानपुर) जा रहे थे। कार सतीश के साढ़ू राकेश सिंह, निवासी मुंडला (सांवेर), चला रहे थे।
शिवांश का जन्म मन्नतों के बाद हुआ था और पांच अगस्त को उसका जन्मदिन था। घटना के बाद सतीश भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे।
कार में बच्चों की सुरक्षा के लिए सावधानियां
नवजात से दो वर्ष तक के बच्चों के लिए कार की पिछली सीट पर रियर-फेसिंग चाइल्ड कार सीट का उपयोग करना चाहिए। दो से चार वर्ष तक के बच्चों के लिए फॉरवर्ड-फेसिंग चाइल्ड कार सीट का इस्तेमाल करें।
चार वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए बूस्टर सीट का उपयोग करें, ताकि सीट बेल्ट छाती और कंधे पर सही ढंग से फिट हो। सामान्य कार सीट बेल्ट वयस्कों के लिए बनाई जाती हैं और छोटे बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं होतीं।
दुर्घटना की स्थिति में बच्चों के सिर और गर्दन पर अधिक दबाव पड़ता है। चाइल्ड कार सीट इस खतरे को काफी हद तक कम करती है।

