BREAKING NEWS
2026-07-25

इंदौर हाई कोर्ट लाउडस्पीकर से ध्वनि प्रदूषण पर सख्त, प्रशासन से मांगा जवाब

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार्मिक स्थलों पर लगे लाउड स्पीकरों के कारण हो रहे ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती दिखाई है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने कहा कि अधिकारी भले ही कार्रवाई का दावा कर रहे हों, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है।

Advertisement

कोर्ट ने मौजूदा कार्रवाई को असंतोषजनक बताया और जिला प्रशासन से ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों को स्पष्ट करने को कहा है। युगलपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की बात करना पर्याप्त नहीं है।

प्रशासन को बताना होगा कि वास्तव में क्या कार्रवाई की गई, कितने मामलों में कार्रवाई हुई, उसका परिणाम क्या रहा, और भविष्य में प्रदूषण रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

यह जनहित याचिका अमिताभ उपाध्याय ने एडवोकेट अभिनव धानोतकर के माध्यम से हाई कोर्ट में प्रस्तुत की है। याचिका में कहा गया है कि धार्मिक स्थलों पर लाउड स्पीकर की तेज आवाज से होने वाले शोर से रहवासी परेशान हैं।

याचिकाकर्ता ने बताया कि शासन ने लाउड स्पीकर को लेकर कानून बनाए हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है, और इन कानूनों का पालन सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। उन्होंने वाहनों में तेज लाउड स्पीकर बजाने को नियंत्रित करने और रात 10 बजे के बाद धार्मिक स्थलों या अन्य खुले स्थानों पर तय मापदंडों से अधिक तेज आवाज वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाने की भी मांग की है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 27 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में कहा गया था कि धार्मिक परिसर या लाउड स्पीकर की आवाज 10 डेसीबल या 75 डेसीबल, जो भी कम हो, उससे अधिक नहीं होनी चाहिए।

याचिकाकर्ता ने यह भी जानकारी दी कि निजी स्थानों पर लाउड स्पीकर की आवाज पांच डेसीबल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, और हाई कोर्ट ने इन निर्देशों का पालन कराने की जिम्मेदारी पुलिस और कलेक्टर को सौंपी थी।

पंद्रह माह पहले हाई कोर्ट की युगलपीठ ने शासन, पुलिस और प्रशासन से 2024 में जारी इन आदेशों के पालन में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि तेज आवाज में बज रहे लाउड स्पीकर की शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं होती और पुलिस फोन तक नहीं उठाती।

कोर्ट के आदेश पर खजराना जोन एसीपी आशीष पटेल, मल्हारगंज जोन एसीपी एएस जादौन और मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जाती है।

इस पर कोर्ट ने मौखिक जानकारी को अपर्याप्त बताते हुए स्पष्ट रूप से पूछा कि किन व्यक्तियों या संस्थाओं के विरुद्ध और क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि यह कार्रवाई किस कानून के अंतर्गत की गई, इसका क्या परिणाम रहा, और भविष्य में प्रदूषण रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।

इस मामले में अब तीन अगस्त को सुनवाई होगी। इंदौर में अब रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध रहेगा और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।