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2026-08-04

इंदौर जिला अस्पताल में गंभीर घायल को उपचार न मिलने का आरोप, बाद में हुई मौत

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

धार रोड स्थित नए जिला अस्पताल को लगभग 83 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना था। हालांकि, अस्पताल शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद सामने आए एक मामले ने इसकी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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हाथी के हमले में घायल ऑटो चालक का मामला

पिछले दिनों हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल एक ऑटो चालक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने उपचार करने के बजाय उन्हें एमवाय अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजनों के अनुसार, इस दौरान घायल लगभग आधे घंटे तक अस्पताल परिसर में दर्द से तड़पता रहा। बाद में घायल को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यह घटना 25 जुलाई की शाम करीब साढ़े चार बजे राजनगर पुलिस चौकी के सामने हुई थी। 49 वर्षीय विजय होलकर हाथी को गुड़ खिला रहे थे, इसी दौरान हाथी ने अचानक उन पर हमला कर दिया। परिजनों के अनुसार, हाथी ने उन्हें पैरों से कुचल दिया, जिससे उनकी रीढ़ और कमर की कई हड्डियां टूट गईं। गंभीर हालत में परिजन उन्हें ऑटो से सीधे नए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे।

उपचार में देरी और परिजनों के आरोप

मृतक के छोटे भाई संजय होलकर ने बताया कि अस्पताल कर्मियों को हाथी के हमले की जानकारी देने पर उन्हें कहा गया कि अस्पताल में इस तरह के गंभीर मरीज के उपचार की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। अस्पताल कर्मियों ने परिजनों को एमवाय अस्पताल ले जाने को कहा। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन लगभग आधे घंटे तक न एंबुलेंस पहुंची और न ही स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया। इस दौरान घायल अस्पताल परिसर में ही दर्द से कराहता रहा। संजय होलकर के अनुसार, एंबुलेंस और डायल-112 पर कई बार फोन करने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिली। अंततः परिजन घायल को अपने ऑटो से नजदीक स्थित वर्मा यूनियन अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां उपचार शुरू हुआ, लेकिन शाम करीब 7.15 बजे विजय होलकर ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल में समय पर प्राथमिक उपचार और तत्काल समुचित व्यवस्था मिल जाती, तो शायद विजय की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर बने अस्पताल में गंभीर मरीजों के उपचार की व्यवस्था नहीं है, तो आम लोगों को उससे क्या लाभ मिलेगा।

प्रशासनिक सहायता और जांच की मांग

संजय होलकर ने बताया कि हादसे के बाद अब तक न कोई जनप्रतिनिधि परिवार से मिलने पहुंचा और न ही प्रशासन की ओर से किसी आर्थिक सहायता की घोषणा की गई। विजय होलकर अपने पीछे पत्नी, 11 वर्षीय बेटे और बुजुर्ग मां को छोड़ गए हैं। परिवार की आजीविका सिलाई और ऑटो चलाने पर निर्भर है। परिजनों ने सरकार से आर्थिक सहायता और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष

जिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित कर क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा किया गया था। अस्पताल के संचालन के बाद उम्मीद थी कि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिलेगा और रेफरल की स्थिति कम होगी। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. भूपेंद्र शेखावत से फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका कोई जवाब प्राप्त नहीं हो सका। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने जानकारी दी कि सिविल सर्जन द्वारा उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक, घायल का प्रारंभिक उपचार निजी अस्पताल में हुआ था। डॉ. हसानी ने बताया कि घायल को देर शाम को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल लाया गया था, जो अगले दिन सुबह हुआ।