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2026-07-22

इंदौर को मिला पहला डबलडेकर फ्लायओवर, अरबिंदो से बाणगंगा लेन बुधवार से शुरू

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर के सबसे व्यस्त जंक्शन लवकुश चौराहे पर हर दिन सफर करने वाले 50 हजार से अधिक वाहन चालकों के लिए खुशखबरी है। चौराहे पर बनकर तैयार हुए बहुप्रतीक्षित डबलडेकर फ्लायओवर की पहली लेन अरबिंदो से बाणगंगा तरफ बुधवार से शुरू की जा रही है। इस लेन के चालू होते ही रोजाना चौराहे पर गुत्थमगुत्था हो रहे ट्रैफिक को बड़ी राहत मिलेगी। आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े के मुताबिक, रोड की सेफ्टी और व्हीकल टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। अस्थायी तौर पर लाइटिंग की व्यवस्था कर दी गई है और बुधवार से इस पर ट्रैफिक की आवाजाही आधिकारिक रूप से शुरू कर दी जाएगी।

पुल की विशेषताएं और लाभ

इंदौर के इतिहास में प्रथम बार अरविंदो से बाणगंगा की तरफ जाने वाले पुल से वाहनों की आवाजाही कल से आरंभ होने जा रही है। इस पुल की विशेषता है कि यह डबल डेकर पुल है। यह नगर का प्रथम डबल डेकर पुल है, इस पुल से मेट्रो भी गुजरेगी। इस पुल की एक लाइन आरंभ होने से यातायात काफी सुगम होने की संभावना है। आगामी सिंहस्थ में इस पुल से यात्रियों को काफी लाभ होगा। यह पुल 1454 मीटर लंबा और 6 लाइन का होगा, पुल के नीचे मेट्रो लाइन रहेगी। इस पुल का निर्माण 175 करोड़ की लागत से किया गया है। यह प्रदेश का प्रथम डबल डेकर पुल है। इंदौर विकास प्राधिकरण ने इस पुल का निर्माण किया है।

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यातायात पर प्रभाव

पहली लेन चालू होने से सर्विस रोड के गड्डों से मुक्ति मिलेगी। मरीमाता और बाणगंगा की ओर जाने वाले ट्रैफिक को अब नीचे की बदहाल, खस्ताहाल और संकरी सर्विस रोड से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ उज्जैन की तरफ से आने वाले बड़े ट्रक, बसें और मिनी ट्रक अब बिना किसी रेड सिग्नल या जाम में फंसे सीधे बाणगंगा व मरीमाता की ओर जा सकेंगे। वहीं सुपर कॉरिडोर और एमआर-10 की ओर जाने वाले वाहन भले ही अभी सर्विस रोड से गुजरेंगे, लेकिन ऊपर का हैवी ट्रैफिक कम होते ही नीचे सर्विस रोड का जाम बहुत हद तक कम हो जाएगा।

दूसरी लेन के संचालन में देरी

ब्रिज की दूसरी लेन बाणगंगा से अरबिंदो तरफ भी लगभग तैयार है। इसके पूर्ण संचालन में अभी कुछ दिन का समय लगेगा। अधिकारियों के अनुसार, दूसरी लेन पर डामर की परत बिछाने का काम बाकी है। लगातार हो रही बारिश के कारण डामर प्लांट में काम प्रभावित होता है और गीली सतह पर डामरीकरण तकनीकी रूप से सही नहीं रहता। बारिश का दौर थमते ही इस पर डामर बिछाकर दूसरी लेन को भी खोल दिया जाएगा।

इंदौर का ऐतिहासिक पहला पुल

1818 में इंदौर के राजधानी बनने के बाद अंग्रेज अधिकारियों ने निवास और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए रेसीडेंसी क्षेत्र को चुना था। रेसीडेंसी क्षेत्र के नियम कानून अंग्रेज अधिकारियों द्वारा निर्धारित किए जाते थे। यहां होल्कर राज्य की व्यवस्था नहीं थी, विकास का दायित्व अंग्रेज अधिकारियों के जिम्मे था। होल्कर रियासत में प्रथम अंग्रेज रेजिडेंट के रूप में गेराल्ड वेलेजली की नियुक्ति हुई थी। वेलेजली 1818 से 1831 तक रेजिडेंट रहे। इन्हीं रेजिडेंट ने 1820 में नवलखा में कान्ह नदी पर एक पुल का निर्माण करवाया था। आवागमन की दृष्टि से यह पुल महत्वपूर्ण था। 1882 में इस पुल का सरदार गोविंदराव बोलिया की देखरेख में जीर्णोद्वार किया गया था। इस तरह नगर का यह प्रथम पुल था जो शहर को एक क्षेत्र से जोड़ने का कार्य करता था।

पुल निर्माण का क्रम जारी

1849 में कृष्णपुरा और 1901 में चंद्रभागा पुल निर्मित हुए और यह क्रम जारी रहा। शास्त्री ब्रिज, सियागंज, गाडीअड्डा, भंडारी ब्रिज, जूनी इंदौर, राजेंद्र नगर, तीन इमली, सुपर कॉरिडोर, खजराना और कई पुलों का निर्माण हुआ। कई पुलों का निर्माण जारी है।