बुलंद सोच, इंदौर।
शिप्रा से भोपाल तक ट्रैक्टर रैली निकालने जा रहे किसानों को बरलई में रोक दिया गया। इससे नाराज किसान धरने पर बैठ गए और रैली निकालने की मांग पर अड़े रहे। दोपहर से शुरू हुआ यह धरना प्रदर्शन देर रात प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश के बाद समाप्त हुआ। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
पश्चिम रिंग रोड भूमि अधिग्रहण से प्रभावित 39 गांवों के किसानों की ट्रैक्टर रैली को बरलई-शिप्रा में रोका गया था। रैली रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। करणी सेना परिवार के आह्वान पर निकाली जा रही रैली में शामिल किसान धरने पर बैठ गए और वापस हटने से मना कर दिया। धरना लंबा चलता देख प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर डटे रहे और किसानों को समझाइश देते रहे। सड़क पर डंपर और बैरिकेडिंग कर किसानों का रास्ता अवरुद्ध किया गया, लेकिन किसानों ने बैरिकेडिंग हटा दी। इसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का उपयोग किया, जिसका असर थोड़ी देर तक रहा। बाद में जब किसान फिर आगे बढ़ने लगे, तो पुलिस को आंसू गैस छोड़ना पड़ा।
चार गुना मुआवजे की मांग और पृष्ठभूमि
पश्चिमी रिंग रोड का शुरुआत से ही विरोध रहा है। इस विरोध को रोकने के लिए प्रशासन ने प्रभावित गांवों की गाइडलाइन में 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर मुआवजा दिया था। इससे अधिग्रहण राशि 600 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। विरोध समाप्त होने के बाद किसानों के खातों में राशि पहुंच गई थी और भूमि अधिग्रहण की अधिकांश प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। अब किसान चार गुना मुआवजा राशि की मांग कर रहे हैं। पश्चिमी रिंग रोड की मुआवजा राशि वितरित होने और अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा किसानों को भूमि अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजे की घोषणा की गई थी। इसी कारण अब किसान चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। मुआवजा राशि के पुनर्निर्धारण के लिए संबंधित आर्बिट्रेशन में जाने की प्रक्रिया अधिकारियों द्वारा किसानों को समझाई गई, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। किसानों ने चार गुना मुआवजा, खाद्य उपलब्धता सहित विभिन्न मुद्दों का ज्ञापन सौंपा।
