बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समेत 8 विधेयक पारित हो गए। यूसीसी बिल पारित करने वाला मध्य प्रदेश चौथा भाजपा शासित राज्य बन गया है। अब यह बिल राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस बिल में बहुविवाह, ट्रिपल तलाक, हलाला और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे प्रावधानों पर चर्चा की गई है।
विवाह पंजीकरण के प्रमुख प्रावधान
यूसीसी के तहत अब मध्य प्रदेश में सितंबर 2008 के बाद विवाह करने वालों का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। उन्हें यूसीसी लागू होने के एक साल के भीतर पंजीयन कराना होगा। यह कानून मध्य प्रदेश के बाहर रहने वाले ऐसे लोगों पर भी लागू होगा, जो कानूनन यहीं के निवासी हैं। 23 सितंबर 2008 से यूसीसी लागू होने तक हुई ऐसी सभी शादियां, जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनका पंजीकरण एक साल में कराना अनिवार्य होगा। जिनका पंजीकरण पहले ही हो चुका है, उन्हें दोबारा आवेदन नहीं करना होगा। 2008 से पहले की शादी का पंजीकरण स्वैच्छिक रहेगा। यदि मध्य प्रदेश का निवासी राज्य के बाहर शादी करता है और उसका पंजीकरण नहीं हुआ है, तो वह पंजीकरण करा सकेगा। पंजीकरण नहीं कराने पर रजिस्ट्रार नोटिस जारी कर सकेगा। इसके बाद भी पंजीकरण नहीं कराने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, सिर्फ पंजीकरण नहीं होने से विवाह अवैध नहीं माना जाएगा।
नौकरी एवं सेवा रिकॉर्ड पर प्रभाव
यूसीसी की धारा 21 के अनुसार, कोई भी सरकारी या निजी नियोक्ता कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड में वैवाहिक स्थिति तभी बदलेगा, जब वह यूसीसी के तहत जारी विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र देगा। इसका अर्थ है कि शादी के बाद सिर्फ शादी का कार्ड, हलफनामा या अन्य दस्तावेज मान्य नहीं होंगे। पति या पत्नी का नाम जोड़ने या वैवाहिक स्थिति बदलने के लिए पहले विवाह का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। वर्तमान में कई तरह के दस्तावेजों से रिकॉर्ड अपडेट हो जाता है। इसका असर नॉमिनी, पीएफ, पारिवारिक पेंशन, बीमा व अन्य सेवा लाभों पर कैसे पड़ेगा, यह आगे जारी होने वाले नियमों और निर्देशों से स्पष्ट होगा।
संपत्ति विवाद और रक्षक की नियुक्ति
यदि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी संपत्ति पर विवाद हो, गलत कब्जे या दुरुपयोग की आशंका हो तो अदालत रक्षक नियुक्त कर सकेगी। रक्षक अदालत की निगरानी में संपत्ति का कब्जा लेकर उसकी सूची तैयार करेगा। जरूरत पड़ने पर संपत्ति को सील या सुरक्षित रख सकेगा और उसके रखरखाव के इंतजाम करेगा। वह समय-समय पर रिपोर्ट भी देगा। पहले ऐसी व्यवस्था भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 में थी, जिसे यूसीसी ने अपने कानून का हिस्सा बना दिया है।
राज्य के बाहर लागू होने के नियम
यह कानून ऐसे लोगों पर भी लागू हो सकता है, जो दूसरे राज्य में रह रहे हैं, पर कानूनन मध्य प्रदेश के निवासी हैं। ऐसे व्यक्ति को मध्य प्रदेश का निवासी माना जाएगा जो मध्य प्रदेश में रहता हो, राज्य या केंद्र सरकार का ऐसा कर्मचारी हो जो मध्य प्रदेश में पदस्थ हो, राज्य की योजनाओं का लाभार्थी हो, या मध्य प्रदेश में जन्मा ऐसा व्यक्ति हो जिसके माता-पिता यहां के निवासी हों या यहां अचल संपत्ति हो और वह किसी दूसरे राज्य का निवासी न बना हो। यदि कोई नौकरी, पढ़ाई या कारोबार के कारण दूसरे राज्य में रहता है, पर मध्य प्रदेश का निवासी है, तो उस पर भी यह कानून लागू होगा।
विधानसभा में यूसीसी पर बहस
यूसीसी पर मंगलवार को सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा यूसीसी के बहाने आरएसएस का एजेंडा लागू कर जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी से सभी नागरिकों पर समान कानून लागू होगा और धार्मिक रीति-रिवाजों में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश के विधायी इतिहास में पहली बार किसी विधेयक के मसौदे पर 10 लाख सुझाव मिले, जिनमें 93% लोगों ने समर्थन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समर्थन करने वालों में 80% मुस्लिम महिलाएं और 40% मुस्लिम पुरुष भी शामिल हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने यूसीसी विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। कांग्रेस ने ओबीसी को 27% आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए सदन में नारेबाजी की। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का मुस्लिमों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का संशोधन प्रस्ताव भी सदन ने खारिज कर दिया। सदन के बाहर सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार यूसीसी के जरिए आरएसएस का एजेंडा लागू कर रही है। हंगामे के बीच एक ही दिन में यूसीसी समेत 8 विधेयक पारित हो गए।
अन्य महत्वपूर्ण विधेयक पारित
मध्य प्रदेश राजमार्ग विधेयक भी पारित किया गया, जिसके तहत राज्य राजमार्गों पर सरकार यूजर चार्ज लगा सकेगी। मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक भी पारित हुआ। इसके तहत दुकानें और प्रतिष्ठान 24 घंटे खुल सकेंगे, बशर्ते 8 घंटे में ड्यूटी बदली जाए। सप्ताह में 4 दिन 48 घंटे की ड्यूटी अॉवर तय होंगे, जो आपसी सहमति से कर्मचारी और मालिक तय कर सकेंगे। गिग वर्कर्स भी श्रम संहिता के दायरे में आएंगे। महिला सुरक्षा के लिए कार्यस्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान किया गया है। श्रम ट्रिब्यूनल गठित होने तक मौजूदा श्रम न्यायालय काम करेंगे। फायर सेफ्टी एक्ट भी पास हुआ, जिसके तहत फायर सर्विस के लिए नया सर्विस कैडर गठित होगा। इसका संचालन नगरीय निकाय करेंगे और सुपरविजन राज्य सरकार करेगी। नया सर्विस कैडर डायरेक्टर फायर सेफ्टी के अधीन होगा। सेफ्टी रूल तोड़ने पर 5 लाख रुपये तक पेनल्टी लगेगी। आग लगने की झूठी सूचना पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। फायर प्लान और फायर सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। आग बुझाने में लापरवाही करने वाले कर्मियों को 3 माह तक की जेल या 3 माह के वेतन के बराबर जुर्माना लगेगा। धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक के अनुसार उज्जैन में धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय स्थापित होगा। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, चंबल के जिलों का क्षेत्राधिकार इसी विश्वविद्यालय को मिलेगा। कुलपति के स्थान पर यहां भी कुलगुरु होंगे। कुलगुरु की नियुक्ति के लिए किसी भी मेडिकल कॉलेज में 10 साल प्रोफेसर के रूप में सेवा का अनुभव जरूरी होगा। राज्य सरकार 3 नामों का पैनल कुलाधिपति को सुझाएगी, उन्हीं में से एक की नियुक्ति कुलगुरु के रूप में होगी।
