बुलंद सोच, इंदौर।
हीरानगर पुलिस ने दो आरोपितों, मयंक और शोभित, के हाथ-पैर पर पट्टा बांधा और उन्हें मोहल्ले में जुलूस के रूप में निकाला। पुलिस ने इस दौरान तस्वीरें खिंचवाईं और यह संदेश दिया कि कानून का डंडा चल गया है। पुलिस ने दावा किया कि इन आरोपितों को गिरने से चोटें आई थीं।
हालांकि, जेल गेट पर पहुंचते ही, जहां कैमरों की सीधी नजर नहीं थी, आरोपितों के हाथ-पैर से पट्टे खोल दिए गए और उन्हें झाड़ियों में फेंक दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम को एक जागरूक व्यक्ति ने अपने कैमरे में कैद कर लिया, जिससे पुलिस की कार्रवाई का सच सामने आ गया।
आरोप है कि नकली पट्टा बांधने और आरोपितों की पिटाई से बचाने के एवज में पुलिस द्वारा 20 हजार रुपये भी लिए गए। बताया गया है कि यह पूरी प्रक्रिया हीरानगर एसीपी रुबिना मिजवानी के निर्देशन में संपन्न हुई थी। इस घटना के वीडियो में एसीपी रुबिना मिजवानी का नाम भी लिया गया है।
इस मामले पर एसीपी रुबिना मिजवानी ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह वीडियो रविवार रात ही उनके पास पहुंचा है और घटना के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचित कर दिया गया है।
पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने लूट, चाकूबाजी और तोड़फोड़ के आरोपितों को सबक सिखाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत गिरफ्तारी के दौरान आरोपितों के हाथ-पैर में फ्रैक्चर बताया जाता है और बाकायदा पट्टे बांधकर तस्वीरें खिंचवाई जाती हैं। चोट के प्रमाण के तौर पर आयुक्त को एक्स-रे रिपोर्ट भी भेजी जाती है। इस घटना ने आयुक्त की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है और पूरे कमिश्नरेट की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक अन्य वीडियो भी सामने आया है जिसमें एएसआई दिनेश त्रिपाठी दोनों आरोपितों का जुलूस निकाल रहे हैं। वीडियो में आरोपितों से कान पकड़वाकर माफी मंगवाई जा रही है। आरोपितों को चलने में परेशानी हो रही थी और वे पैर में दर्द होने की बात कह रहे थे। जेल के पास से सामने आए वीडियो ने इस पूरे मामले को नकली साबित कर दिया है।

