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2026-07-31

इंदौर चिड़ियाघर बाघों की संख्या में देश में दूसरे स्थान पर, छोटे चिड़ियाघरों में प्रजनन में अव्वल

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय, इंदौर, बाघों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। यह चिड़ियाघर छोटे श्रेणी के चिड़ियाघरों में वन्य प्राणियों की कुल संख्या, प्रजातियों की विविधता और सफल ब्रीडिंग के मामले में देश में पहले स्थान पर है।

पिछले 10 वर्षों की अवधि में यहां 26 बाघ शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से लगभग 22 शावक पूरी तरह स्वस्थ होकर बड़े हुए हैं। इसी दौरान इंदौर से 20 बाघ देश के विभिन्न चिड़ियाघरों में एक्सचेंज किए गए हैं। वर्तमान में यहां 13 बाघ मौजूद हैं।

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यहां हर वर्ष दर्शकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, और देश भर से लोग वन्य प्राणियों को देखने आ रहे हैं।

सफल प्रजनन का रहस्य

जू प्रभारी डॉ. उत्तम यादव के अनुसार, ब्रीडिंग की सफलता की मुख्य कुंजी तनावमुक्त माहौल है।

यदि कोई बाघ लगातार चक्कर काटता है, बार-बार उठता-बैठता है, बेचैन दिखता है या जगह बदलने का प्रयास करता है, तो इसे तनाव का संकेत माना जाता है।

चिड़ियाघर में किसी भी नर और मादा बाघ को सीधे एक साथ नहीं रखा जाता है; सबसे पहले उनकी पैडिग्री शीट की जांच की जाती है, जिसमें 8 से 10 पीढ़ियों तक का रिकॉर्ड दर्ज होता है। इसके साथ ही उनकी ब्लड लाइन का भी ध्यान रखा जाता है।

विशेषज्ञों की टीम सुबह के समय जैसे ही बाघ बाड़ों से बाहर निकलते हैं, उनकी प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखती है।

कौन सा बाघ कितनी देर टहल रहा है, किसका व्यवहार सामान्य है और कौन तनाव में दिखाई दे रहा है, इन सभी बातों को रिकॉर्ड किया जाता है।

यही सूक्ष्म निगरानी, प्राकृतिक माहौल और वैज्ञानिक प्रबंधन इंदौर के चिड़ियाघर में बाघों की संख्या बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय मांग और वन्य जीवों का कुनबा

इंदौर के चिड़ियाघर के बाघों की मांग देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के देशों से आती है। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत यहां से प्राणियों को दूसरे चिड़ियाघरों में भेजकर उन वन्य जीवों को यहां लाया जाता है, जिनकी इंदौर में आवश्यकता होती है।

इंदौर के प्राणी संग्रहालय में 13 बाघ, 15 शेर और 3 तेंदुए निवास कर रहे हैं।

इन सभी को मिलाकर यह कुनबा कुल 31 का हो जाता है, और देश के कोने-कोने से पर्यटक इन वन्य जीवों को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं।