बुलंद सोच, जबलपुर।

जबलपुर में साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर सिविल लाइंस क्षेत्र में रहने वाले एक वृद्ध दंपती से करीब 22 लाख रुपये की ठगी की है। ठगों ने सेवानिवृत्त अधिकारी प्रकाश पॉल शेजवाल (75) और उनकी पत्नी डोरा शेजवाल को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स केस में फंसाने का झांसा दिया।
आरोपितों ने इस दंपती को लगभग 13 दिन तक अपने जाल में रखा, जिसमें छह दिन तक उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया।
ठगों ने वृद्ध शेजवाल को 21 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वाकर यह रकम आरटीजीएस के माध्यम से एक दूसरे खाते में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया। इसके अतिरिक्त, उनके बैंक खाते से 98,999 रुपये भी ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए गए।
पुलिस में शिकायत और जांच
ठगी का अहसास होने पर पीड़ित प्रकाश पॉल शेजवाल ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद, पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
सिविल लाइंस स्थित अनु डिफेंस कॉलोनी निवासी प्रकाश पॉल शेजवाल, जो एक निजी कंपनी के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और अपनी पत्नी डोरा शेजवाल के साथ रहते हैं, के मोबाइल पर 22 जुलाई को आठ अलग-अलग नंबरों से कॉल आए।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका नाम हितेश मेहता के मनी लॉन्ड्रिंग और कमलेश जरीवाला के ड्रग्स मामले से जुड़ा है। इसके बाद किसी अन्य अधिकारी से बात कराने की बात कही गई।
इसी दिन, शेजवाल के वॉट्सएप पर अंग्रेजी में एक नोटिस भेजा गया, जिस पर ‘सीबीआई गवर्नमेंट नोटिस’ लिखा था। इस दस्तावेज को देखकर पीड़ित आरोपितों की बातों पर भरोसा कर बैठे।
अगले दिन, 23 जुलाई को, खुद को प्रशांत सिंह पाटिल बताने वाले एक व्यक्ति ने कॉल किया और शेजवाल के परिवार तथा बैंक खातों से संबंधित जानकारी एकत्र की।
रकम का हस्तांतरण और लगातार निगरानी
आरोपितों ने शेजवाल पर 21 लाख रुपये की एफडी तुड़वाने का दबाव बनाया। इसके लिए उन्हें एटीएस के नाम से एक फर्जी पत्र भी भेजा गया।
27 जुलाई तक, आरोपित वॉट्सएप के माध्यम से हर दो घंटे में शेजवाल की हाजिरी लेते रहे। दबाव में आकर, 28 जुलाई को शेजवाल बैंक पहुंचे और अपनी एफडी तुड़वाकर पूरी रकम निकाल ली।
इसके बाद उन्होंने यह रकम आरटीजीएस के जरिए जितेंद्र कुमार के आईसीआईसीआई बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी।
रकम ट्रांसफर होने के बाद, आरोपितों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ खत्म करने का दिखावा किया, लेकिन वे लगातार शेजवाल की गतिविधियों की निगरानी करते रहे।
उन्होंने इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट और रिजर्व बैंक के नाम से फर्जी रसीदें भेजीं और रकम वापस करने का झांसा दिया। आरोपित 4 अगस्त तक पीड़ित के संपर्क में रहे।
आरोपितों ने शेजवाल को वॉट्सएप की पूरी चैट डिलीट करने के लिए भी मजबूर किया, जिसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
इस दौरान, उनके बैंक खाते से 98,999 रुपये भी ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए थे, जो बबलू नाम के व्यक्ति के खाते में पहुंचे।
पुलिस अब मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन के आधार पर आरोपितों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

