बुलंद सोच, जबलपुर।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, जबलपुर ने एक बीमा कंपनी को परिवादी मंगिलाल चोपड़ा को 26,224 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने अपनी सुनवाई में पाया कि बीमा कंपनी द्वारा की गई कटौती में यह राशि परिवादी को देय थी।
यह विवाद अधिवक्ता अरुण जैन के माध्यम से गोरखपुर, जबलपुर निवासी मंगिलाल चोपड़ा द्वारा दायर किया गया था। उनकी मेडिक्लेम पॉलिसी 31 अक्टूबर 2019 से 30 अक्टूबर 2020 तक प्रभावी थी। कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्होंने मेट्रो हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, जबलपुर में अपना उपचार कराया था।
उपचार का कुल बिल 1.40 लाख रुपये का प्रस्तुत किया गया था, जिसमें से बीमा कंपनी ने 66,328 रुपये का भुगतान किया। परिवादी मंगिलाल चोपड़ा ने शेष राशि की कटौती को अनुचित बताते हुए आयोग की शरण ली थी।
सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि बीमा कंपनी ने 78,672 रुपये का भुगतान स्वीकार किया था, जबकि उपचार संबंधी बिल में 1,04,896 रुपये की कटौती दर्शाई गई थी।
आयोग ने कोविड-19 के प्रथम वर्ष में उपचार की परिस्थितियों और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया। इसके आधार पर, आयोग ने 1,04,896 रुपये की कटौती में से 26,224 रुपये को परिवादी को देय माना।
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह आदेश की तारीख से दो माह के भीतर 26,224 रुपये का भुगतान करे। यदि भुगतान नहीं किया जाता है, तो कंपनी को 6 अगस्त 2021 से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इसके अतिरिक्त, बीमा कंपनी को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में पांच हजार रुपये और परिवाद व्यय के रूप में दो हजार रुपये भी देने होंगे।
यह आदेश 12 मई 2026 को आयोग के अध्यक्ष नवीन कुमार सक्सेना और सदस्यों सुषमा पटेल एवं मनोज कुमार मिश्रा ने पारित किया।

