बुलंद सोच।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी को मॉनसून सत्र की शेष अवधि के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया है। सत्तापक्ष की ओर से प्रस्ताव लाए जाने के बाद लोकसभा में यह कार्रवाई की गई। टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इस निलंबन का विरोध किया है। उन्होंने इसे प्रक्रियात्मक रूप से गलत बताते हुए निलंबन तत्काल वापस लेने की मांग की है।
निलंबन का कारण और सौगत रॉय का तर्क
कल्याण बनर्जी पर कार्यवाही स्थगित रहने के दौरान एनसीपीआई सांसद मिताली बाग और अन्य महिला सांसदों के साथ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है। संयुक्त विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की ओर से बोलते हुए सौगत रॉय ने बताया कि जिस समय कथित घटना हुई, उस समय सदन की कार्यवाही नहीं चल रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में लोकसभा के नियम 374(2) के तहत कार्रवाई करना उचित नहीं है। रॉय ने जानकारी दी कि आज दोपहर दो बजे के बाद कार्यवाहक सभापति ने एक नोटिस पढ़ा, जिसमें कल्याण बनर्जी को पूरे सत्र के लिए निलंबित करने की बात कही गई। उन्होंने आगे कहा कि उस समय सदन में मौजूद कई सदस्य यह भी नहीं समझ पाए कि सभापति क्या कह रहे थे। सौगत रॉय के अनुसार, यदि सभापति का इशारा कल्याण बनर्जी और मिताली बाग के बीच हुई बहस की ओर था, तो उस समय सदन की कार्यवाही नहीं चल रही थी। उन्होंने बताया कि उस समय माइक्रोफोन बंद थे और पीठासीन अधिकारी भी मौजूद नहीं थे। रॉय ने यह भी कहा कि कल्याण बनर्जी को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका मिला, इसलिए उन्हें निलंबित करने का प्रस्ताव नियमों के अनुरूप नहीं है। रॉय ने स्पष्ट किया कि नियम 374(2) केवल सदन की कार्यवाही के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू होता है। उन्होंने कहा कि जब सदन स्थगित हो, माइक्रोफोन बंद हों और पीठासीन अधिकारी मौजूद न हों, तब इस नियम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। रॉय ने जोर देकर कहा कि खाली सदन में हुई घटना पर नियम 374(2) लागू नहीं होता है और उन्होंने निलंबन तुरंत वापस लेने की मांग की।
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात
सौगत रॉय ने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु के कई दलों, जिनमें डीएमके भी शामिल है, के प्रतिनिधियों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की। इन दलों ने इस कार्रवाई का विरोध दर्ज कराया। रॉय ने कहा कि जो कुछ हुआ वह अन्याय था और उन्होंने उसी अन्याय के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के सामने अपनी आवाज उठाई। उन्होंने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु के कई दल उनके साथ थे। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि चूंकि प्रस्ताव सत्तापक्ष की ओर से आया है, इसलिए वह उनसे चर्चा करेंगे और कल सुबह अपना फैसला सुनाएंगे।
कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया
इस बीच, कल्याण बनर्जी ने भी अपने निलंबन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए बागी सांसदों पर निशाना साधा। बनर्जी ने बागी सांसदों को ‘गद्दार’ और ‘बेईमान’ बताते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल में उन्हें कोई जनसमर्थन नहीं है। कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें यहां से निलंबित करके उन्हें क्या मिलेगा। उन्होंने इसे मुश्किल से बीस लोगों की पार्टी बताया। बनर्जी ने कहा कि उन्होंने डेढ़ महीने बाद कोलकाता में बैठक की और उनके पास बीस वोटर भी नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में उन्हें एक भी व्यक्ति का समर्थन नहीं मिला है। बनर्जी ने उन्हें ‘गद्दार’ और ‘बेईमान’ लोग बताया और कहा कि यह सरकार एक साल बाद गिर जाएगी।
