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2026-08-06

खंडवा दस्तक अभियान: 183 कुपोषित बच्चे एनआरसी में भर्ती, 52 को डायरिया

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, खंडवा।

खंडवा जिले में 14 जुलाई से 31 अगस्त तक दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण का कार्य जारी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अभियान की रफ्तार अपेक्षा से धीमी बनी हुई है। जिले में पंजीकृत 1 लाख 19 हजार 97 बच्चों में से अब तक केवल 35 हजार 388 बच्चों की ही स्क्रीनिंग हो सकी है।

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स्वास्थ्य परीक्षण के निष्कर्ष

स्क्रीनिंग के दौरान कुल 183 बच्चे कुपोषित पाए गए। इन बच्चों को उपचार और पोषण प्रबंधन के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया गया है। इसके अतिरिक्त, 52 बच्चों में डायरिया के लक्षण मिले हैं, जबकि 48 बच्चों में गंभीर बीमारियों के लक्षण पाए गए हैं। अभियान के तहत 30 हजार 748 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाई गई है, जिसका उद्देश्य उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाना है।

जिला टीकाकरण अधिकारी का वक्तव्य

जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अनिल तंतवार ने बताया कि स्क्रीनिंग के दौरान अधिकांश बच्चे स्वस्थ मिले हैं। उन्होंने जानकारी दी कि मौसम में बदलाव के कारण डायरिया और अन्य मौसमी बीमारियों के कुछ मामले सामने आ रहे हैं, जिनकी विशेष निगरानी की जा रही है। डॉ. तंतवार ने यह भी सुनिश्चित किया कि जिन बच्चों में बीमारी के लक्षण मिलते हैं, उनका तत्काल उपचार और नियमित फालोअप किया जा रहा है।

अभियान के तहत प्रदान की जा रही सेवाएं

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दस्तक अभियान के तहत स्वास्थ्य अमला घर-घर पहुंचकर पांच प्रमुख सेवाएं प्रदान कर रहा है। इन सेवाओं में प्रत्येक परिवार को दो-दो ओआरएस के पैकेट और 14 जिंक की गोलियां देना शामिल है। बच्चों को आयरन सिरप भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन परिवारों में कुपोषित या डायरिया से पीड़ित बच्चे मिल रहे हैं, उनका समुचित उपचार और पोषण प्रबंधन सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही, गंभीर संक्रमण अथवा अन्य बीमारियों से प्रभावित बच्चों की पहचान कर उनका उपचार भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

अभियान की निगरानी और निर्देश

इस अभियान की निगरानी सीधे सीएमएचओ द्वारा की जा रही है। अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है और मैदानी अमले को स्क्रीनिंग की गति बढ़ाने तथा प्रत्येक पात्र बच्चे तक पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश में एनीमिया की स्थिति

मध्य प्रदेश में 70.62 लाख बच्चों की जांच में हर दूसरा बच्चा एनीमिया का शिकार पाया गया है। चॉकलेट-चिप्स के शौक को इस समस्या का एक कारण बताया गया है।