बुलंद सोच, खंडवा।
पंधाना क्षेत्र में काकोड़ा के जंगल क्षेत्र से लगे जामली के पास अंबाखेड़ा में रविवार सुबह वन विभाग द्वारा कंपार्टमेंट नंबर 711 जामली बीट में लगाए गए पिंजरे में एक तेंदुआ देखा गया। पिंजरे में तेंदुआ देखकर ग्रामीणों की भीड़ लग गई और उन्होंने राहत की सांस ली।
पकड़ने के प्रयास
तेंदुए को पकड़ने के लिए विभाग पिछले चार दिनों से प्रयास कर रहा था। शनिवार को विभाग ने एक बड़ा पिंजरा रखकर उसमें तेंदुए को पकड़ने के लिए मुर्गा चारा के रूप में रखा। यह तरकीब कारगर साबित हुई और तेंदुआ मुर्गे का शिकार करने पिंजरे के अंदर आया और कैद हो गया।
तीन माह से दहशत का माहौल
जानकारी के अनुसार, तीन माह से अंबाखेड़ा के ग्रामीण विभाग को क्षेत्र में तेंदुए की हलचल की सूचना दे रहे थे। विभाग ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए की गतिविधि की पुष्टि की थी। तेंदुए की हलचल से ग्रामीणों में तीन माह से दहशत का माहौल पनप गया था, जिसके चलते वे रात के समय खेतों की ओर जाने से कतराने लगे थे।
यहां के ग्रामीणों ने कई बार तेंदुए की हलचल देखी थी और उन्हें डर था कि किसी दिन तेंदुआ घातक साबित न हो जाए, इस डर के चलते वे सावधान रह रहे थे। रविवार सुबह जब तेंदुए को पिंजरे में कैद देखा गया तो सभी ने राहत की सांस ली।
पहले के असफल प्रयास
चार दिन पहले तेंदुए को पकड़ने के लिए विभाग द्वारा अंबाखेड़ा के ग्रामीणों द्वारा बताए गए स्थान पर एक छोटा पिंजरा रखा गया था, लेकिन इसमें तेंदुआ नहीं आया। शनिवार दोपहर को इसी स्थान पर एक बड़ा पिंजरा और उसमें मुर्गा भी रखा गया, जो सफल रहा।
तेंदुए को सुरक्षित छोड़ा गया
वन विभाग ने तेंदुए को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया है। तेंदुए को पंधाना और बोरगांव सर्किल के वनाधिकारियों और कर्मचारियों ने सुरक्षित कंपार्टमेंट नंबर 718, इटारिया के पास दीवाल बीट में छोड़ा।
रेंजर का बयान
रेंजर शंकर सिंह चौहान ने बताया कि अंबाखेड़ा गांव तक तेंदुए के आने की सूचना मिली थी और करीब तीन माह से क्षेत्र में लगातार उसकी हलचल की शिकायतें मिल रही थीं। उन्होंने पुष्टि की कि रविवार सुबह पिंजरे में आने के बाद तेंदुए को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया है।

