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2026-07-27

स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना अंतिम चरण में, 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, सतना।

कटनी जिले के स्लीमनाबाद में विंध्य पर्वतमाला के भीतर निर्मित लगभग 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी गुरुत्वाकर्षण आधारित जल सुरंग अंतिम चरण में है। इसी वर्ष इसके संचालन की उम्मीद है। इसके साथ ही नर्मदा का पानी पहली बार सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के खेतों तक बड़े पैमाने पर पहुँचेगा, जिससे 17 वर्षों का इंतजार समाप्त होगा।

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यह परियोजना विंध्य क्षेत्र में कृषि, पेयजल, भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली है। लगभग 17 वर्षों की इंजीनियरिंग चुनौती के बाद तैयार हुई यह सुरंग बरगी बांध का पानी प्राकृतिक ढाल के सहारे सोन बेसिन तक पहुँचाएगी। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि पानी को उठाने के लिए किसी पंप की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि यह पूरी प्रणाली गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत पर आधारित है। इससे ऊर्जा की बचत होगी और संचालन लागत भी कम रहेगी।

यदि वितरण नहरों का कार्य समय पर पूरा होता है, तो सतना, मैहर, रीवा और पन्ना को भविष्य में जल संकट तथा वर्षा आधारित खेती की समस्या से बड़ी राहत मिल सकती है।

परियोजना की लागत और निर्माण अवधि

स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना वर्ष 2008-09 में शुरू की गई थी, जिसका प्रारंभिक लक्ष्य कुछ वर्षों में इसे पूरा करना था। विंध्य पर्वतमाला की जटिल भूगर्भीय संरचना, कठोर चट्टानें, कई स्थानों पर अत्यधिक जल रिसाव, डिजाइन में बदलाव, भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक विलंब जैसे कारणों से निर्माण कार्य लगातार प्रभावित हुआ।

ठेकेदारी संबंधी समस्याओं और तकनीकी संशोधनों के कारण परियोजना को पूरा होने में लगभग 17 वर्ष लग गए। परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग 799 करोड़ रुपये थी, जो लंबे निर्माण के कारण बढ़कर लगभग 1,600 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।

सिंचित क्षेत्र और लाभान्वित गाँव

इस परियोजना से कुल 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसका सर्वाधिक लाभ सतना और मैहर जिलों को मिलेगा, जहाँ क्रमशः 1,04,970 हेक्टेयर और 54,227 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।

इसी प्रकार कटनी जिले का 21,823 हेक्टेयर, रीवा जिले का 3,084 हेक्टेयर और पन्ना जिले का 448 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा। केवल सतना और मैहर में ही लगभग 1.59 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी।

परियोजना पूरी होने पर जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गाँव लाभान्वित होंगे। इनमें बड़ी संख्या उन गाँवों की है जहाँ खेती आज भी पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।

सिंचाई सुविधा मिलने से किसान साल में दो से तीन फसलें ले सकेंगे, जिससे धान, गेहूं, चना, मसूर, सरसों और बागवानी फसलों का रकबा बढ़ने तथा उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

वितरण नहरों का महत्व और अन्य लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार, सुरंग का निर्माण सबसे कठिन चरण था, लेकिन परियोजना की वास्तविक सफलता वितरण नहरों के समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगी। मुख्य नहर और शाखा नहरों का अधिकांश हिस्सा तैयार हो चुका है, जबकि कई क्षेत्रों में वितरण नहरों का कार्य अंतिम चरण में है। इन्हीं नहरों के माध्यम से पानी गाँवों और खेतों तक पहुँचेगा।

यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। नहरों में नियमित जल प्रवाह से आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ेगा, जिससे कुएँ, हैंडपंप और ट्यूबवेल रिचार्ज होंगे। इससे सतना, मैहर और रीवा के कई ग्रामीण इलाकों में गर्मियों के दौरान पेयजल संकट कम होने की उम्मीद है।

कृषि विशेषज्ञों के मतानुसार, सिंचाई बढ़ने से फसल उत्पादन के साथ-साथ डेयरी, बागवानी और कृषि आधारित उद्योगों को भी गति मिलेगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पलायन में कमी आएगी और विंध्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाएँ मजबूत होंगी।

परियोजना का विस्तृत विवरण

बरगी डायवर्जन परियोजना (स्लीमनाबाद जल सुरंग) कटनी जिले के स्लीमनाबाद में स्थित है। इसकी सुरंग की लंबाई लगभग 11.95 किलोमीटर है और इसका निर्माण लगभग 17 वर्षों में पूरा हुआ है।

परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग 799 करोड़ रुपये थी, जो संशोधित होकर लगभग 1,600 करोड़ रुपये हो गई है।

इस परियोजना से कटनी, मैहर, सतना, रीवा, पन्ना और जबलपुर कमांड क्षेत्र सहित कुल लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसमें सतना का 1,04,970 हेक्टेयर, मैहर का 54,227 हेक्टेयर, रीवा का 3,084 हेक्टेयर और पन्ना का 448 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है।

परियोजना से कुल लगभग 1450 गाँव लाभान्वित होंगे।