बुलंद सोच, भोपाल।
मानसून सत्र के पहले दिन नियम-139 के तहत सदन में खाद-बीज की उपलब्धता और कम बारिश की स्थिति पर लंबी चर्चा हुई।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि हर साल पर्याप्त खाद का दावा किया जाता है, लेकिन किसान समय पर खाद नहीं मिलने से परेशान हैं। सिंघार ने आरोप लगाया कि किसान यूरिया के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहता है, परंतु उसे खाद की जगह सिर्फ ओटीपी मिलता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सर्वर डाउन होने के कारण किसान बिना खाद लिए लौट जाते हैं। सिंघार ने सुझाव दिया कि पंचायत स्तर पर खाद का वितरण किया जाए, जिससे कालाबाजारी पर रोक लगे और किसानों को आसानी से खाद मिल सके।
उन्होंने कहा कि मुद्दा सरकारी आंकड़ों का नहीं, बल्कि किसानों तक खाद पहुंचने का है। सिंघार ने मांग की कि सरकार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की एक संयुक्त समिति (जेपीसी) बनाकर किसानों के बीच जाए, जिससे जमीनी स्थिति सामने आ सके। हालांकि, सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
सरकार का पक्ष: खाद-बीज की कमी नहीं
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि प्रदेश में खाद और बीज की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में कमी है, तो संबंधित विधायक जानकारी दें, सरकार तुरंत व्यवस्था करेगी।
मंत्री कंसाना ने यह भी कहा कि यदि किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा होता, तो मध्यप्रदेश लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार नहीं जीतता। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए किसानों को खाद नहीं मिलने की बात को तथ्यहीन बताया।
बहस के दौरान मंत्री कंसाना के एक बयान पर सदन में हंगामा भी हुआ। उन्होंने कहा कि जो किसान और सेना का अपमान करता है, वह सत्ता में आने के योग्य नहीं है। इस पर कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताई, जिसके परिणामस्वरूप कुछ देर तक सदन में नोकझोंक चली।
सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने भी कहा कि प्रदेश में खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि सरकार इस वर्ष को ‘कृषि कल्याण वर्ष’ के रूप में मना रही है और किसानों के हित में लगातार काम कर रही है।
अन्य संबंधित जानकारी
सारंग ने जानकारी दी कि प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा जरूर हुई है, लेकिन औसतन केवल 16 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केवल अलीराजपुर जिला अल्प वर्षा की श्रेणी में है।
मंत्री ने कहा कि खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ई-विकास पोर्टल लागू किया गया है। कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करते हुए 10 लाइसेंस निरस्त किए गए हैं और 16 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।
सारंग ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल 5.48 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है और इसकी कोई कमी नहीं है। इसके अलावा, 27 लाख मीट्रिक टन बीज भी भंडारित है। बीज उत्पादन और वितरण का कार्य बीज संघ के माध्यम से किया जा रहा है।
सारंग ने कहा कि प्रदेश की मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में अब तक 16 लाख नमूनों की जांच की जा चुकी है। वहीं, वर्ष 2025 में 11.54 लाख किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ मिला।
उन्होंने दावा किया कि मध्यप्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और सरकार किसानों की हर समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
