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2026-07-24

मध्य प्रदेश यूसीसी में ‘लव जिहाद’ पर शिकंजा: लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य, धोखाधड़ी पर 5 साल की जेल

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) प्रभावी होने के बाद ‘लव जिहाद’ के मामलों में कमी आने की संभावना है। राज्य सरकार ने यूसीसी की धारा 366 में लिव-इन रिलेशनशिप स्थापित करने के लिए बल या कपट से सहमति प्राप्त करने पर पांच वर्ष की सजा का प्रावधान किया है। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीयन करवाना अनिवार्य होगा। पहचान दस्तावेजों के माध्यम से पहचान सुनिश्चित की जाएगी, जिससे नाम बदलकर धोखा देना संभव नहीं होगा। वर्तमान में, ‘लव जिहाद’ के सर्वाधिक मामले नाम बदलकर झांसा देने के ही सामने आते हैं।

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धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की प्रभावशीलता

इससे पहले, वर्ष 2021 में प्रदेश सरकार ने ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को रोकने के लिए मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू किया था, परंतु यह कानून अधिक प्रभावी नहीं रहा। इस अधिनियम के अंतर्गत सजा की दर भी बहुत कम रही है। धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत प्रदेश में अब तक 430 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। इनमें से 58 मामलों में निर्णय आया है, जिनमें 51 आरोपित बरी हो गए हैं, जबकि दो मामलों में खात्मा लगा दिया गया। लगभग डेढ़ सौ मामले अभी भी न्यायालयों में विचाराधीन हैं।

संगठित गिरोहों का खुलासा

प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के संगठित गिरोह पिछले वर्ष भोपाल और इंदौर में सामने आ चुके हैं। भोपाल के मामलों में पुलिस की जांच में यह भी उजागर हुआ था कि आरोपितों ने गिरोह बनाकर एक निजी कॉलेज की हिंदू छात्राओं से पहले दोस्ती की, फिर उनके साथ दुष्कर्म किया। छात्राओं के अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल भी किया गया और उन पर मतांतरण का दबाव डाला गया। इसी प्रकार, एक वर्ष पहले इंदौर के बाणगंगा थाने में दो युवकों पर दुष्कर्म और मत बदलने का दबाव बनाने का प्रकरण दर्ज किया गया था। पुलिस जांच में यह सामने आया था कि युवक इंटरनेट मीडिया पर अपना हिंदू नाम दिखाते थे। ‘लव जिहाद’ के लिए फंडिंग करने के मामले में इंदौर में पार्षद अनवर कादरी को भी पुलिस ने आरोपित बनाया था।

अधिवक्ता की राय

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के अनुसार, यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को बहुत अच्छे से परिभाषित किया गया है। इसमें जितने भी प्रावधान हैं, वे सभी वर्गों के लिए हितकारी होंगे। उन्होंने कहा कि संविधान ने सभी को समानता का अधिकार दिया है, उसी के अनुरूप यूसीसी के नियम तैयार किए गए हैं। अधिवक्ता सिंह ने यह भी बताया कि जिस तरह स्पेशल कोर्ट बनने पर संबंधित मामलों में सुनवाई तेजी से होने लगती है, उसी तरह जब विशेष कानून लागू होता है तो ‘लव जिहाद’ या कोई अन्य अपराध हो, उनमें कमी आना तय है, जिसके कई उदाहरण मौजूद हैं।