बुलंद सोच, इंदौर।
रविवार को मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ इंदौर के सैफी नगर पहुंचा, जहाँ नाते-रिश्तेदार, दोस्त और परिचितों सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। मेजर हमजा का निधन जैसलमेर (राजस्थान) में एक दुर्घटना में हो गया था। उनके माता-पिता और पत्नी इस घटना के दर्द से उबर नहीं पा रहे थे। सैफी नगर मस्जिद परिसर में दाऊदी बोहरा समाज के लोगों की उपस्थिति में सैयदना साहब के प्रतिनिधि शब्बीर भाई साहब हुसामी ने जनाजे की नमाज अदा की और मगफिरत के लिए दुआ की।
सैन्य सम्मान और परंपराएं
जनाजे की नमाज के बाद, तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर सेना के वाहन में इमली बाजार स्थित दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंचा। यहाँ सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, साथी अधिकारियों और अन्य गणमान्य लोगों ने पुष्पचक्र अर्पित कर मेजर हमजा आरिफ को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और सम्मान के प्रतीक स्वरूप बिगुल बजाया गया। सुपुर्दे खाक से पहले, पार्थिव देह को लपेटे गए तिरंगे को विधिवत मोड़कर उनकी पत्नी ज्योति अरोड़ा को प्रदान किया गया।
अंतिम यात्रा और श्रद्धांजलि
मेजर की अंतिम यात्रा में सेना के वाहन के पीछे सैकड़ों वाहनों का काफिला चल रहा था। इस दौरान ‘मेजर हमजा आरिफ अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए गए। राजवाड़ा पर बड़ी संख्या में शहरवासियों ने मेजर हमजा आरिफ को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा में राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक एकता के प्रति सम्मान का भाव देखा गया।
देश सेवा को प्राथमिकता
मेजर के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले हार्दिक देवकर ने बताया कि मेजर का बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट हुआ था, लेकिन उन्होंने देश सेवा को चुना था। बुरहानपुर में रहने वाले उनके चाचा मुस्तफा हमदर्द ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। इस अवसर पर उनके पिता फखरुद्दीन आरिफ, पत्नी ज्योति अरोड़ा, परिजन, शहर काजी इशरत अली, जौहर मानपुरवाला, मजहर हुसैन सेठजीवाला और बुरहानुद्दीन शकरुवाला सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

