बुलंद सोच, ग्वालियर।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा 40 अंतरराज्यीय बस रूटों पर लागू की जा रही ‘विशेष परिवहन योजना’ की प्रक्रिया को बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा 7 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है।
इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने राज्य शासन और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। सरकार का जवाब मिलने के बाद इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
यह याचिका निजी स्टेज कैरेज बस ऑपरेटर धर्मेंद्र सिंह द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि वह प्रस्तावित मार्गों के कुछ हिस्सों पर वर्षों से बसों का संचालन कर रहा है और सरकार की नई योजना से उसके व्यावसायिक अधिकारों का सीधा हनन हो रहा है।
याचिका में उठाए गए प्रमुख सवाल
दायर याचिका में दो प्रमुख सवाल उठाए गए हैं। पहला सवाल यह है कि योजना पर प्राप्त होने वाली आपत्तियों का निपटारा परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह (आईएएस) को करना है। मनीष सिंह ‘मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ के प्रबंध संचालक (एमडी), एमपीएसआरटीसी के एमडी और इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सीईओ जैसे प्रमुख पदों पर भी कार्यरत हैं।
इस पर सरकार की ओर से वकील ने न्यायालय में कहा कि जिस कंपनी को योजना से लाभ पहुंचाया जा रहा है, उसी के एमडी आपत्तियों पर फैसला सुनाएंगे। वकील ने तर्क दिया कि “कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता,” जो कि सीधे तौर पर न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है।
दूसरा सवाल यह उठाया गया है कि संबंधित कंपनी को ‘स्टेट ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग’ (एसटीयू) का दर्जा प्राप्त नहीं है। याचिका में कहा गया है कि सरकार स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) और कंपनी एक्ट के तहत नई कंपनियां बनाकर बसें चलाना चाहती है। केवल कंपनी बना देने से उसे कानूनी तौर पर ‘स्टेट ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग’ (एसटीयू) का दर्जा हासिल नहीं हो जाता। इसलिए, इस कंपनी को मोटर वाहन अधिनियम के अध्याय-6 के तहत मिलने वाले विशेष अधिकार नहीं दिए जा सकते।
इन गंभीर आधारों पर याचिकाकर्ता ने सरकार की पूरी अधिसूचना को गैर-कानूनी बताते हुए उसे निरस्त करने का आग्रह किया है।
विवाद का मूल
यह पूरा विवाद राज्य सरकार द्वारा मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा-99 के तहत 7 जुलाई 2026 को जारी एक अधिसूचना से संबंधित है। इस अधिसूचना के तहत 40 प्रमुख बस रूटों पर संचालन का एकाधिकार ‘मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ को देने का प्रस्ताव किया गया था।
इस मामले में आम जनता और अन्य ऑपरेटरों से आपत्तियां मांगी गई थीं।

