बुलंद सोच, ग्वालियर।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि तलाक के बाद पूर्व पत्नी को अपने पूर्व पति की संपत्ति या सेवा संबंधी लाभों पर दावा करने का अधिकार नहीं रहता।
इसी आधार पर अदालत ने अमरी बाई अहिरवार की ओर से दायर रिट अपील को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने यह फैसला सुनाया।
यह मामला दिवंगत कर्मचारी रामचरण अहिरवार के सेवानिवृत्ति लाभ और अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित था।
मूल याचिका रामचरण अहिरवार की पूर्व पत्नी और उनकी पुत्री ने दायर की थी।
एकलपीठ ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए थे कि यदि दिवंगत कर्मचारी द्वारा किया गया नामांकन सही और वैध पाया जाता है, तो सेवानिवृत्ति संबंधी समस्त लाभ उन्हें प्रदान किए जाएं।
साथ ही, पुत्री के अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर नियमानुसार विचार किया जाए।
अमरी बाई अहिरवार ने एकलपीठ के इस आदेश को चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि उनका रामचरण अहिरवार से विधिवत तलाक हो चुका था।
हालांकि, उनका तर्क था कि दूसरी महिला भी कानूनी रूप से पत्नी नहीं है, इसलिए उसे भी लाभ नहीं मिलना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि जब अपीलकर्ता का वैवाहिक संबंध विधिवत तलाक से समाप्त हो चुका है, तो पूर्व पति की संपत्ति या सेवा लाभों पर उसका कोई अधिकार नहीं रह जाता।
इसलिए वह दूसरे पक्ष के अधिकारों को चुनौती देकर स्वयं कोई लाभ प्राप्त नहीं कर सकती।
अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि तर्क के लिए यह मान भी लिया जाए कि दूसरी महिला का विवाह कानूनी रूप से वैध नहीं था, तब भी दिवंगत कर्मचारी की पुत्री होने के कारण बेटी सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने और अनुकंपा नियुक्ति पर विचार किए जाने की हकदार रहेगी।
इन तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने माना कि एकलपीठ के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है।
परिणामस्वरूप, अमरी बाई अहिरवार की रिट अपील खारिज कर दी गई।
