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2026-08-06

एमपी-यूडीसी ने जाली बैंक गारंटी पर दिया 6.57 करोड़ का ठेका, गुजरात की कंपनी पर FIR दर्ज

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपी-यूडीसी) ने जाली बैंक गारंटी के आधार पर गुजरात की एक कंपनी को करोड़ों रुपयों का ठेका दिया। यह फर्जीवाड़ा काम पूरा होने के बाद बैंक से पत्राचार होने पर सामने आया।

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इस संबंध में एमपी-यूडीसी के वित्त नियंत्रक सौरभ तिवारी ने भोपाल के एमपी नगर थाने में सूरत की इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी प्राइवेट लिमिटेड- (ज्वाइंट वेंचर विद साउथ गुजरात कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड) के विरुद्ध धोखाधड़ी और जालसाजी की शिकायत दर्ज कराई है।

एमपी-यूडीसी मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में नल-जल और सीवरेज परियोजनाओं का क्रियान्वयन करती है।

वर्ष 2024 में इस सरकारी कंपनी ने निविदा के माध्यम से एडीबी फेज-1, एडीबी फेज-2 और विशेष निधि के अंतर्गत मंडलेश्वर परियोजना का कार्य आवंटित किया था। यह कार्य इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी प्रा.लि. को प्राप्त हुआ।

अनुबंध के प्रावधानों के तहत, इस कंपनी ने निष्पादन और सुरक्षा प्रतिभूति के रूप में लगभग 6.57 करोड़ रुपये मूल्य की आठ बैंक गारंटी जमा की थीं। ये बैंक गारंटी बैंक ऑफ इंडिया की साकीनाका (मुंबई) और आईसीआईसीआई बैंक, तीनहाट नाका (ठाणे) के नाम से बनाई गई थीं।

एमपी-यूडीसी के अधिकारियों ने बैंक गारंटी की सत्यता की पुष्टि के लिए बैंकों के अधिकृत पते पर जाने के बजाय उन ई-मेल पतों पर संदेश भेजे, जो बैंक गारंटी वाले दस्तावेजों पर दर्ज थे। जवाब में, बैंक गारंटी के सही होने की पुष्टि भी प्राप्त हो गई।

इस पुष्टि के आधार पर अनुबंधों को प्रभावी किया गया और संबंधित फर्म ने परियोजनाओं का कार्य पूरा कर लिया।

बाद में, बैंक गारंटी के मूल दस्तावेजों को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से संबंधित बैंक शाखाओं को भेजकर उनका भौतिक सत्यापन कराया गया।

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान, बैंक ऑफ इंडिया की साकीनाका (मुंबई) शाखा ने स्पष्ट किया कि उसके नाम से प्रस्तुत पांचों बैंक गारंटी कभी उनके द्वारा जारी नहीं की गईं। इसी प्रकार, आईसीआईसीआई बैंक की तीनहाट नाका (ठाणे) शाखा ने भी अपने नाम से प्रस्तुत तीनों बैंक गारंटी को फर्जी बताया।

इसके पश्चात, एमपी-यूडीसी को इस फर्जीवाड़े का पता चला।

पुलिस ने जांच के दौरान कंपनी के संचालक से पूछताछ के लिए उपलब्ध मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया, लेकिन दोनों नंबर बंद मिले। इस कारण उनके बयान दर्ज नहीं हो सके।

पुलिस अब कंपनी के संचालकों और इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।

यह उल्लेखित है कि बैंक गारंटी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि यदि ठेकेदार अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो उसकी जमा राशि जब्त की जा सके।

एमपी-यूडीसी के अधिकारियों ने लगभग एक माह पूर्व फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर सरकारी ठेके प्राप्त करने की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई।