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2026-08-02

मुंबई में 90 वर्षीय बुजुर्ग से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 1.57 करोड़ रुपये की ठगी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, मुंबई।

मुंबई में साइबर ठगों ने 90 वर्षीय एक बुजुर्ग को सात महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 1.57 करोड़ रुपये की ठगी की है। इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने अखबार में डिजिटल अरेस्ट से संबंधित एक खबर पढ़ी। खबर पढ़ने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि वे सरकारी जांच का हिस्सा नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों के जाल में फंस चुके थे।

पीड़ित की पहचान और ठगी की शुरुआत

नवी मुंबई के नेरुल निवासी यह बुजुर्ग अपनी पत्नी के साथ रहते हैं, जबकि उनके बच्चे अमेरिका में हैं। साइबर ठगों ने उनके अकेलेपन का फायदा उठाते हुए 12 जनवरी से 30 जुलाई के बीच उन्हें लगातार डिजिटल अरेस्ट में रखा।

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धोखाधड़ी का तरीका

आरोपियों ने स्वयं को दूरसंचार विभाग और मुंबई पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी बताया और बुजुर्ग से संपर्क किया। एक आरोपी ने अपना नाम राम मोहन, दूसरे ने चर्चित पुलिस अधिकारी दया नायक बताया, जबकि दीपाली नामक एक महिला भी इस गिरोह का हिस्सा थी। ठगों ने बुजुर्ग को बताया कि उनका नाम अवैध लेन-देन के मामले में सामने आया है और उनके बैंक खातों की जांच चल रही है।

जांच और धमकी

भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने बुजुर्ग को फर्जी सरकारी नोटिस भेजे और एक नकली सरकारी वेबसाइट भी दिखाई। इसके बाद दंपती को धमकाया गया कि वे सरकारी निगरानी में हैं, इसलिए घर से बाहर नहीं निकल सकते और किसी को भी इस कार्रवाई की जानकारी नहीं दे सकते। आरोपी दिन-रात व्हाट्सएप कॉल और वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखते रहे और लगातार मानसिक दबाव बनाते रहे।

आर्थिक नुकसान और ठगी का अहसास

डर और तनाव के इस माहौल में बुजुर्ग ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट तक तुड़वा दीं। ठगों के निर्देशों पर उन्होंने कुल 1.57 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। लगभग सात महीने बाद, जब उन्होंने अखबार में डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से होने वाली ठगी पर प्रकाशित एक खबर पढ़ी, तब उन्हें यह बात समझ में आई कि उनका किस्सा भी अखबार में छपी खबर से मिलता-जुलता है और वह खुद साइबर ठगों के शिकार बन चुके हैं।

पुलिस कार्रवाई

इसके बाद बुजुर्ग ने नवी मुंबई साइबर पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई है, उनके लेन-देन का विश्लेषण किया जा रहा है और साइबर ठगों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।