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2026-08-03

मध्य प्रदेश में 31,000 करोड़ रुपये की लागत से 6 से 8 लेन का नर्मदा प्रगति पथ बनेगा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

देश में गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों के तटों पर आधुनिक सड़कें बनाकर कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा रहा है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी के किनारे ‘नर्मदा एक्सप्रेसवे’ के निर्माण की तैयारी की जा रही है। यह 6 से 8 लेन वाला नेशनल हाईवे मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी छोर को आपस में जोड़ेगा। ‘ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट’ के तौर पर विकसित होने वाला यह मार्ग गुजरात और छत्तीसगढ़ के बीच सीधी और सुगम कनेक्टिविटी स्थापित करेगा। यह मार्ग नर्मदा के उद्गम स्थल से लेकर गुजरात की सीमा तक मध्य प्रदेश के 11 प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा। लगभग 31,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट को अब ‘नर्मदा प्रगति पथ’ का नाम दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इसके रूट में कुछ बदलाव किए गए हैं और जल्द ही इसकी संशोधित डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) सामने आने की उम्मीद है।

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परियोजना की मुख्य विशेषताएं और मार्ग

नर्मदा प्रगति पथ एक 6 से 8 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा। मध्य प्रदेश में इसकी कुल लंबाई 906 किलोमीटर होगी, जबकि गुजरात तक प्रस्तावित कुल मार्ग 1,300 किलोमीटर का होगा। इस परियोजना से मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ राज्य लाभान्वित होंगे। परियोजना का कुल अनुमानित बजट 31,000 करोड़ रुपये है। भविष्य में यातायात के दबाव को देखते हुए इसे 8 लेन तक विकसित किया जाएगा। यह एक्सप्रेसवे राज्य के प्रमुख प्रशासनिक मुख्यालयों, तीर्थ स्थलों और पर्यटन केंद्रों को एक सूत्र में पिरोएगा। यह मार्ग अमरकंटक (कबीर चबूतरा) से शुरू होकर डिंडोरी, जबलपुर, ओबेदुल्लागंज, बुधनी, नसरुल्लागंज, संदलपुर, कर्नाड, इंदौर, धार और सरदारपुर-झाबुआ से होते हुए मध्य प्रदेश-गुजरात सीमा तक जाएगा। नर्मदा तट के आसपास के शहरों और कस्बों को शामिल करने से यह मार्ग देश के करीब 30 राष्ट्रीय राजमार्गों से सीधे जुड़ जाएगा। यद्यपि इसका अंतिम मानचित्र अभी जारी नहीं हुआ है, फिर भी यह मार्ग अनूपपुर, डिंडोरी, शाहपुरा, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, खिरकिया, हरदा, हरसूद, मुंडी, खंडवा, सनावद, बड़वाह, ओंकारेश्वर, महेश्वर, बड़वानी और अलीराजपुर जैसे क्षेत्रों को आच्छादित करेगा।

जन-सुविधाएं और आर्थिक प्रभाव

एक्सप्रेसवे पर यात्रियों, पर्यटकों और माल वाहकों की सहूलियत के लिए आधुनिक ‘पब्लिक यूटिलिटी सेंटर’ बनाए जाएंगे। मार्ग में जगह-जगह पेट्रोल पंप, पुलिस स्टेशन, रेस्टोरेंट, भोजनालय, बस स्टैंड, लॉज, होटल और शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। भारतमाला परियोजना के तहत बनने वाला यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को बदलेगा। मार्ग के दोनों ओर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स और लॉजिस्टिक हब्स विकसित होंगे। गुजरात से सीधा संपर्क होने के कारण व्यापार, परिवहन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। नर्मदा किनारे बसे धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों पर पर्यटकों की पहुंच आसान होगी, जिससे स्थानीय रियल एस्टेट और टूरिज्म सेक्टर में तेजी आएगी।

योजना का घटनाक्रम

नर्मदा एक्सप्रेसवे योजना पहली बार मई 2020 में प्रस्तावित की गई थी। वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश वाले हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को मंजूरी मिली। फरवरी 2022 में राज्य के 906 किलोमीटर लंबे हिस्से के निर्माण की योजना को अंतिम स्वीकृति दी गई। वर्तमान में ‘नर्मदा प्रगति पथ’ के संशोधित रूट के अनुसार नई डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके पूर्ण होते ही भूमि अधिग्रहण और टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।