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2026-08-03

गोराखाल झरना बना मध्य प्रदेश का खूबसूरत इको-टूरिज्म स्पॉट

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, हरदा।

हरदा जिले के रहटगांव तहसील क्षेत्र के वनांचल में वर्षा के दौरान कई मनमोहक दृश्य देखे जा रहे हैं। जंगल और गांवों में चारों तरफ हरियाली नजर आ रही है, जिसके चलते लोग परिवार सहित घूमने जा रहे हैं। वर्षा के बाद नदी और नालों में भी पानी आ गया है।

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तहसील मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर स्थित गोराखाल झरना इस समय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

झरने की ऊंचाई और महत्व

यह झरना लगभग 150 फीट की ऊंचाई से गिरता है। हरदा जिले में यह सबसे बड़ा झरना है, जो इतनी ऊंचाई से गिरता है। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं।

इको-पर्यटन में शामिल करने के प्रयास

पूर्व विधायक संजय शाह और अन्य भाजपा पदाधिकारियों ने झरने पर पहुंचकर उसका अवलोकन किया था। पूर्व विधायक शाह के विशेष प्रयासों से इस झरने को इको पर्यटन में शामिल किया गया था। इसके अतिरिक्त, वन विभाग ने भी इसके लिए प्रयास किए थे।

पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा स्वीकृत राशि

मध्य प्रदेश इको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल द्वारा गोराखाल वाटरफॉल मनोरंजन क्षेत्र स्थल पर कार्य कराए जाने के लिए करीब 20 लाख 10 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसके तहत कई कार्य हुए।

झरने से जुड़ी अंग्रेजों की कहानी

गोराखाल में अंग्रेजों के जमाने का एक रेस्ट हाउस भी मौजूद है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि आजादी से पहले यहां अंग्रेज आते थे और शिकार करने के लिए रुकते थे। आदिवासी अंग्रेजों को ‘गोरी खाल वाले’ कहते थे, उसी आधार पर बाद में इस क्षेत्र का नाम गोराखाल पड़ गया।