बुलंद सोच, इंदौर।
नीट आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की वैधानिकता को लेकर हाई कोर्ट में लोकेंद्रसिंह खडिय़ा द्वारा प्रस्तुत जनहित याचिका मंगलवार को वापस ले ली गई। याचिकाकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट को सूचित किया कि वह याचिका में आगे कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता है। इसके उपरांत, कोर्ट ने याचिका निरस्त कर वापस कर दी।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया था कि उसकी आधिकारिक ओएमआर शीट और उत्तर कुंजी के अनुसार उसे नीट में 305 अंक प्राप्त होने चाहिए थे। हालांकि, अंतिम परिणाम में उसे केवल 64 अंक दिए गए, जिससे 241 अंकों का अंतर आया। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस अंतर से उसका मेडिकल प्रवेश और भविष्य प्रभावित हुआ है।
याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के गठन और इसकी संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि एनटीए संसद द्वारा स्थापित एक वैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि एक सामान्य सोसायटी है। उसने प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए एजेंसी के अधिकारों और उसकी वैधानिक स्थिति की न्यायिक समीक्षा को आवश्यक बताया था।
याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद, हाई कोर्ट ने एनटीए सहित सभी संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। मंगलवार को इन पक्षकारों का जवाब आने की संभावना थी, लेकिन इससे पहले ही याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।

