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2026-08-14

सरकार का परिसीमन विधेयक हेतु संसद गतिरोध समाप्त करने व दो-तिहाई बहुमत जुटाने पर जोर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

सरकार ने परिसीमन के लिए आवश्यक आंकड़े जुटा लिए हैं। अब उसका पूरा ध्यान संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने पर केंद्रित है। परिसीमन से संबंधित प्रस्ताव को संविधान संशोधन विधेयक के रूप में सदन में प्रस्तुत किया जाना है। सरकार नहीं चाहती कि यह विधेयक हंगामे और विपक्ष के बहिष्कार के बीच पेश हो। इसी कारण सरकार ने गतिरोध समाप्त करने के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत तेज कर दी है। कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद विपक्ष को गृह मंत्री अमित शाह के नीट पेपर लीक आंदोलन मामले में जवाब का प्रस्ताव देना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

संसद में गतिरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ एक लंबी बैठक की। इस बैठक में संसद की मौजूदा स्थिति और गतिरोध समाप्त करने के विकल्पों पर चर्चा हुई। सरकार का प्रयास है कि गृह मंत्री के जवाब का अवसर देकर सदन की कार्यवाही सामान्य कराई जाए।

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हालांकि, विपक्ष ने अब अपनी मांगों का दायरा बढ़ा दिया है। पहले विपक्ष नीट पेपर लीक आंदोलन के मामले में शाह के जवाब पर अड़ा था, लेकिन अब राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले पर चर्चा की मांग भी जोड़ दी गई है।

परिसीमन विधेयक पर राजनीतिक समर्थन जुटाने के प्रयास

परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को लेकर डीएमके का रुख सरकार के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है। सरकार के सूत्रों के अनुसार, डीएमके को इस सत्र में एफसीआरए विधेयक नहीं लाने का आश्वासन दिया गया है। इसके बदले डीएमके परिसीमन विधेयक के ड्राफ्ट में सभी राज्यों की सीटों में 50 फीसदी की आनुपातिक बढ़ोतरी चाहती है। सरकार इस मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार है। ऐसे में डीएमके के रुख को सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

एनसीपी के शरद पवार गुट के आठ सांसदों की सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार अब अलग-अलग विपक्षी और गैर-सत्तारूढ़ दलों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। इसका स्पष्ट मकसद संविधान संशोधन विधेयक के लिए आवश्यक संख्या पूरी करना है।

संसद के मौजूदा सत्र में अब केवल तीन बैठकें बची हैं। इसलिए सरकार की कोशिश है कि गृह मंत्री के जवाब के बाद विपक्ष सदन का गतिरोध खत्म करने के लिए तैयार हो जाए। इसी बीच सरकार विपक्ष के भीतर भी ऐसे दलों की तलाश कर रही है, जो कांग्रेस की रणनीति से अलग रुख अपना सकें।

दो-तिहाई बहुमत का गणित

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती संविधान संशोधन विधेयक के लिए आवश्यक दो-तिहाई समर्थन जुटाना है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, सरकार को दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत है।

बजट सत्र में सरकार को 298 सांसदों का समर्थन मिला था। इसके बाद अलग-अलग राजनीतिक बदलावों से यह संख्या बढ़ी है।

तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के 20 सांसदों के समर्थन से यह संख्या 318 हुई। शिवसेना यूबीटी से शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों के बाद आंकड़ा 325 पहुंचा।

शरद पवार गुट के आठ सांसदों के समर्थन से संख्या 333 होगी। डीएमके के 22 सांसद जुड़ने पर आंकड़ा 355 पहुंचेगा।

अकाली दल के एक सांसद के समर्थन से यह संख्या 356 हो जाएगी। दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी चार सांसदों की कमी रहेगी।

आगे की रणनीति और चुनौतियां

सरकार के सामने अब केवल संख्या जुटाने की चुनौती नहीं है, बल्कि संसद में गतिरोध खत्म करना भी जरूरी है। सोमवार को गृह मंत्री के जवाब का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद सदन की कार्यवाही सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद सरकार के मंत्री अलग-अलग विपक्षी दलों से संपर्क साधने में जुट गए हैं।

सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक, मंगलवार को विपक्ष के रुख का इंतजार किया जाएगा और उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी। सरकार का मानना है कि कांग्रेस परिसीमन विधेयक को टालने के लिए ही संसद में गतिरोध बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

संसद के मौजूदा सत्र में केवल तीन बैठकें बची होने के कारण मंगलवार की कार्यवाही सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बेहद अहम हो गई है। सरकार चाहती है कि गृह मंत्री के जवाब के बाद विपक्ष सदन चलने दे, ताकि परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सके। दूसरी ओर विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि क्या सरकार अलग-अलग दलों को साथ लाकर गतिरोध तोड़ पाती है और क्या परिसीमन विधेयक के लिए आवश्यक संख्या जुटाने की उसकी रणनीति सफल होती है।