बुलंद सोच, सतना।
सतना के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत गिंजरा के ग्राम छुलहा की छात्राएं सड़क और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गईं। यह क्षेत्र नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का विधानसभा क्षेत्र है। मौके पर पहुंचे एसडीएम ग्रामीण एलआर जांगड़े, तहसीलदार प्रज्ञा द्विवेदी और जनपद सीईओ प्रतिपाल बागर ने छात्राओं को आश्वासन देकर उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराई।
विकास दावों पर सवाल
ये दोनों घटनाएँ केवल दो गांवों की नहीं, बल्कि राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में विकास के दावों की जमीनी हकीकत को दर्शाती हैं, जिनकी चमक अक्सर सरकारी फाइलों और मंचों तक ही सीमित दिखाई देती है। रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कोठी तहसील की गौरैया ग्राम पंचायत के रामपुरा में लगभग डेढ़ किलोमीटर सड़क वर्षों से कीचड़ और गड्ढों में तब्दील है, जिसके कारण एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। शनिवार को रामपुरा गांव की एक बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन खराब सड़क के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। अंततः बुजुर्ग महिला को खाट पर उठाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ा। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 20 वर्ष पहले लोक निर्माण विभाग ने यहां डब्ल्यूबीएम सड़क का निर्माण किया था, जिसके बाद आज तक न तो उसका उन्नयन हुआ और न ही मरम्मत। बरसात के मौसम में यह सड़क दलदल बन जाती है, जिससे पूरा गांव लगभग कट जाता है। बताया गया है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाय) की फाइल भी आगे नहीं बढ़ी है।
बौलिहा में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
रैगांव विधानसभा के ग्राम छुलहा (पंचायत गिंजरा), करसरा के समीप बौलिहा में स्कूली छात्र-छात्राएं सड़क और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर 27 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल करसरा के लिए स्थायी भवन का निर्माण, करसरा-बौलिहा सड़क का तत्काल निर्माण, बौलिहा प्राथमिक शाला की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना और लगभग 1000 से 1200 आबादी वाले बौलिहा को राजस्व ग्राम घोषित करना शामिल है।
पूर्व में सड़क गुणवत्ता पर विवाद
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र में बनी एक नई डामर सड़क कुछ ही दिनों में उखड़ गई थी। उस समय मंत्री ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। इसके बावजूद, महीनों बाद भी क्षेत्र की कई सड़कें बदहाल हैं और ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

