बुलंद सोच, ग्वालियर।
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की लगभग 40 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति के विवाद में मंगलवार को जिला न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। इस सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित महासमझौते के साथ-साथ उत्तराधिकार और ज्येष्ठाधिकार से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा विभिन्न अदालतों में प्रस्तुत फैमिली सेटलमेंट के बीच, ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ, स्वर्गीय पद्माराजे सिंधिया की पुत्री प्रतिमा देवी ने अदालत में कैविएट दाखिल की है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित समझौते में उनका वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहा है, इसलिए उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाए।
प्रतिमा देवी द्वारा कैविएट दायर करने से मामले में नया कानूनी पेच उत्पन्न हो गया है। अब सभी की नजर आज होने वाली सुनवाई पर है, जिसमें प्रतिमा देवी के मौजूद होने की संभावना भी है।
विवादित संपत्तियां
इस विवाद में शामिल संपत्तियों में कई ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित परिसंपत्तियां शामिल हैं, जैसे: ग्वालियर का जयविलास पैलेस (लगभग 12.40 लाख वर्गफीट, अनुमानित कीमत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये), आजादी के समय सिंधिया परिवार की 100 से अधिक कंपनियों के शेयर, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास, जॉर्ज कैसल कोठी, उज्जैन का कालियादेह पैलेस, नई दिल्ली स्थित ग्वालियर हाउस, राजपुर रोड का प्लॉट और सिंधिया विला पुणे, पुणे का पद्म विलास पैलेस, वाराणसी का सिंधिया घाट तथा गोवा स्थित विठोबा मंदिर।
इन संपत्तियों के विवाद में जयविलास पैलेस पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित है।
कानूनी हलकों में चर्चा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया इस ऐतिहासिक महल पर पूर्ण स्वामित्व चाहते हैं। इसके बदले परिवार के अन्य सदस्यों को दूसरी संपत्तियां देने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
हालांकि, अंतिम निर्णय परिवार की आपसी सहमति पर निर्भर करेगा।

