बुलंद सोच, महेश्वर।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की नगरी महेश्वर के लिए यह एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर है। राष्ट्रपति भवन में १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाले ‘एट होम’ समारोह के निमंत्रण में महेश्वर में हाथ से बुने महेश्वरी स्टॉल को विशेष स्थान दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस समारोह में आने वाले अतिथियों का स्वागत नगर के पारंपरिक रेशम और सूती धागों से हाथ से बुने महेश्वरी स्टॉल से किया जाएगा। इस महेश्वरी स्टॉल में मध्य प्रदेश की महेश्वरी बुनाई के साथ महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वस्त्र कला के रूपांकनों का समावेश किया गया है। यह स्टॉल भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
शिल्पकार कमल गौड़ को राष्ट्रीय सम्मान
पूर्व में घोषित राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार के तहत नगर के शिल्पकार और बुनकर कमल गौड़ को उनकी विशेष कृति “मछुआरों के जाल से महेश्वरी धागों तक : एक गौरवशाली विरासत की दास्तान” के लिए सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा उन्हें सात अगस्त को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। कमल गौड़ की इस साड़ी की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘हीरा पन्ना बॉर्डर’ है। इसकी प्रेरणा नगर के किले की ऐतिहासिक नक्काशी और वास्तुकला से ली गई है। गौड़ ने इसे अपने पूर्वजों, बुनकर समाज और देवी अहिल्याबाई होलकर को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि महेश्वर की ३०० वर्ष पुरानी महेश्वरी बुनाई परंपरा का सम्मान है।
महेश्वर के लिए दोहरी उपलब्धि
नगर के लिए यह दोहरी उपलब्धि मानी जा रही है। एक ओर राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस समारोह में महेश्वरी बुनाई देश की सांस्कृतिक पहचान बन रही है, वहीं दूसरी ओर सात अगस्त को आयोजित समारोह में इसी नगर के बुनकर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इससे महेश्वरी साड़ी और हथकरघा उद्योग को देश-विदेश में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
हैंडलूम व क्राफ्ट टूरिज्म विलेज की पहल
मध्य प्रदेश में एक नई पहल के तहत महेश्वर-कुक्षी में हैंडलूम और क्राफ्ट टूरिज्म विलेज बनाए जाएंगे। इन गाँवों में पर्यटक पारंपरिक वस्त्र कला को देख सकेंगे।

