बुलंद सोच, जबलपुर।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद एक संविदा महिला कर्मचारी को बाल देखभाल छुट्टी (चाइल्ड केयर लीव – सीसीएल) से वंचित करना राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह को महंगा पड़ा है।
हाई कोर्ट ने छुट्टी का आवेदन खारिज करने वाले विभागीय आदेश को निरस्त करते हुए संचालक हरजिंदर सिंह पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है।
याचिकाकर्ता आयशा शेख की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने अवगत कराया कि याचिकाकर्ता नौवीं बार कोर्ट की शरण में आई हैं, जिससे प्रशासकीय मनमानी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
राज्य शिक्षा केंद्र ने 16 जुलाई को आवेदन खारिज करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के 22 जुलाई 2023 के परिपत्र का हवाला दिया था।
हाई कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम, 1977 के नियम 38-सी में महिला सरकारी सेवक को 730 दिन तक बाल देखभाल छुट्टी का प्रावधान है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संविदा महिला कर्मचारी भी दो बच्चों की देखभाल के लिए 240 दिन की छुट्टी की हकदार हैं।
हाई कोर्ट ने साफ किया कि न्यायालय कानून का व्याख्याकार है और उसकी व्याख्या अंतिम होती है, इसलिए विभागीय परिपत्र न्यायिक आदेशों से ऊपर नहीं हो सकते।
कोर्ट ने तत्काल छुट्टी देने और संचालक को 30 दिन में 50 हजार रुपये जमा करने के निर्देश दिए हैं।

