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2026-07-24

संजय पाठक को हाई कोर्ट से अवमानना मामले में राहत, बिना शर्त माफी स्वीकार

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, कटनी।

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भाजपा विधायक संजय पाठक को आपराधिक अवमानना मामले में बड़ी राहत देते हुए उनकी बिना शर्त माफी स्वीकार कर ली है। अदालत ने नौ पन्नों का सुरक्षित फैसला सुनाते हुए अवमानना की कार्रवाई से राहत प्रदान की। कोर्ट ने भविष्य में इस तरह की किसी भी हरकत से बचने की सख्त चेतावनी भी दी।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उस समय चर्चा में आया था, जब अवैध खनन से जुड़े एक विचाराधीन प्रकरण के दौरान विधायक पर संबंधित न्यायाधीश से फोन पर संपर्क करने का प्रयास करने का आरोप लगा था। हाई कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम, दोनों पक्षों की दलीलों और माफी को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय सुनाया।

अदालत का विस्तृत फैसला

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने नौ पन्नों के फैसले में संजय पाठक की बिना शर्त माफी को स्वीकार किया। अदालत ने माना कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें आपराधिक अवमानना के मामले में राहत दी जा सकती है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का सीधा संपर्क या ऐसा प्रयास भविष्य में स्वीकार्य नहीं होगा। अदालत ने विधायक को आगे ऐसी स्थिति से बचने की सख्त नसीहत दी।

फोन कॉल विवाद का विवरण

विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब अवैध खनन से जुड़े एक विचाराधीन प्रकरण की सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक संजय पाठक पर हाई कोर्ट के न्यायाधीश विशाल मिश्रा से फोन पर संपर्क करने का प्रयास करने का आरोप लगा। मामले को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप मानते हुए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी। कोर्ट के पूर्व निर्देश के अनुसार संजय पाठक स्वयं अदालत में उपस्थित हुए और सुनवाई में शामिल रहे।

बचाव पक्ष और हस्तक्षेपकर्ता की दलीलें

विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत में दलील दी कि संबंधित न्यायाधीश को फोन अनजाने में लग गया था। रिकॉर्ड में केवल मिस्ड कॉल और एक परिचयात्मक संदेश का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि संजय पाठक पहले ही बिना शर्त माफी मांग चुके हैं, इसलिए इसे आपराधिक अवमानना का मामला नहीं माना जाना चाहिए। वहीं, हस्तक्षेपकर्ता आशुतोष दीक्षित ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि विचाराधीन मामले में संबंधित न्यायाधीश से संपर्क का प्रयास न्यायिक प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विधायक के पास संबंधित न्यायाधीश का मोबाइल नंबर कैसे पहुंचा।