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2026-07-24

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से 61 वर्ष करने पर विचार करने को कहा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर विचार करने को कहा। अदालत ने यह निर्देश देशभर के जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि सभी राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के उच्च न्यायालयों से परामर्श कर इस मुद्दे पर फैसला लें। पीठ ने यह भी कहा कि यदि वे सहमत होते हैं, तो ऐसे राज्यों में न्यायिक अधिकारियों को 61 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी। यह व्यवस्था इस मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
पीठ ने बताया कि यह व्यवस्था 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यवस्था इस कानूनी प्रश्न पर अंतिम सुनवाई को प्रभावित नहीं करेगी कि क्या पूरे देश में जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु एक समान 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि वह शुरुआत में तय किए गए कानूनी प्रश्न पर स्वतंत्र रूप से फैसला करेगी, चाहे राज्यों या उच्च न्यायालयों का रुख कुछ भी हो।

राज्यों और उच्च न्यायालयों को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे संबंधित उच्च न्यायालयों से परामर्श के बाद दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखें। संबंधित उच्च न्यायालयों को भी इसी अवधि में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।
हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों और उच्च न्यायालयों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर पहले से सहमति है, उन्हें विस्तृत जवाब दाखिल करने की जरूरत नहीं है। उनकी सहमति दर्शाने वाला संक्षिप्त बयान ही पर्याप्त होगा।

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पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2002 के उस फैसले की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें न्यायमूर्ति के. जगन्नाथ शेट्टी आयोग की उस सिफारिश को स्वीकार नहीं किया गया था, जिसमें जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने का प्रस्ताव दिया गया था।
इसके बाद तेलंगाना और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की सिफारिश करते हुए प्रस्ताव पारित किया है।
हालांकि, यह भी बताया गया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय सहित कुछ उच्च न्यायालय इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके राज्यों में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु अब भी 60 वर्ष या उससे कम है।
देशभर में अलग-अलग रुख अपनाए जाने का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि इस मुद्दे का जल्द समाधान जरूरी है। इसलिए जहां राज्य सरकार और संबंधित उच्च न्यायालय दोनों सहमत हों, वहां अंतरिम व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्ति आयु 61 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।

पूर्व के निर्णय

पिछले वर्ष 20 नवंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मध्य प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष कर दी थी।
उस अंतरिम आदेश में पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के इसी तरह के फैसले का भी उल्लेख किया था। पीठ ने कहा था कि जब राज्य सरकार स्वयं ऐसा करने को तैयार है तो न्यायिक अधिकारियों को इसका लाभ देने से क्यों वंचित रखा जाए।
अदालत ने यह भी कहा था कि न्यायिक अधिकारियों और राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों का वेतन एक ही सरकारी खजाने से दिया जाता है। साथ ही पीठ ने यह भी उल्लेख किया था कि राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है।