बुलंद सोच, उमरिया।

जंगली हाथियों ने बांधवगढ़ में एक सकारात्मक कहानी रची है, जहां उन्हें ठिकाना मिला है। मध्य प्रदेश के सीधी, शहडोल, अनूपपुर और डिंडोरी में जहां ये गजराज चुनौती बने हुए हैं, वहीं बांधवगढ़ में अपना आवास प्राप्त करने के बाद ये हाथी यहीं के होकर रह गए हैं।
विश्वभर में जैव विविधता (विभिन्न जीव रूपों में पाई जाने वाली विविधता) के लिए अपनी पहचान रखने वाला बांधवगढ़ नेशनल पार्क छत्तीसगढ़ और झारखंड से आए हाथियों के यहां बसने से समृद्ध हो गया है। पिछले आठ सालों से 70 से अधिक जंगली हाथियों की यहां मौजूदगी है।
जंगली हाथियों ने यहां आकर वास्तव में बांधवगढ़ को जैव विविधता की पहचान भी दिलाई है।
बांधवगढ़ की अनूठी जैव विविधता
बांधवगढ़ की जैव विविधता में बाघ, तेंदुआ, सुस्त भालू, जंगली बिल्लियां, चित्तीदार हिरण, सांभर हिरण, नीलगाय, चिंकारा, भारतीय मृग, चौसिंघा (चार सींग वाला मृग), भारतीय बाइसन गौर, लंगूर, जंगली सूअर, साही, लाल और भारतीय ग्रे नेवला, पाम सिवेट, रस्टी-स्पॉटेड बिल्ली, जंगली बिल्लियां, जंगली कुत्ता, सैकड़ों प्रजाति के पक्षी और सांप सहित कई अन्य वन्य प्राणी शामिल हैं।
प्रोजेक्ट एलिफेंट की आवश्यकता
विशेषज्ञ अब बांधवगढ़ में हाथियों की सुरक्षा और उनके संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट एलिफेंट शुरू किए जाने की जरूरत जता रहे हैं। इससे हाथी संरक्षित होंगे और हाथी-मानव द्वंद्व भी समाप्त होगा।
जंगली हाथी और मानव द्वंद्व रोकने की दिशा में लंबे समय से काम करने वाले पुष्पेंद्र नाथ द्विवेदी का कहना है कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ में प्रोजेक्ट एलिफेंट चलाया गया है, उसी तरह से मध्य प्रदेश में भी यह प्रोजेक्ट चलाया जाना चाहिए।
प्रोजेक्ट एलिफेंट के माध्यम से हाथी और मानव द्वंद्व जैसी कई बाधाओं को दूर किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ में लेमरू (हाथी) प्रोजेक्ट के तहत धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथी कॉरिडोर में आने वाले कापू, बोरो तथा धरमजयगढ़ रेंज के जंगलों में बांस उगाए गए, ताकि हाथी अपने पसंदीदा भोजन खाने में ही व्यस्त रहें और किसानों की फसलों की ओर रुख न करें।
यदि मध्य प्रदेश में एलिफेंट प्रोजेक्ट चलाया जाए तो हाथियों से बचाव के लिए स्थानीय लोगों को शिक्षित किया जाना आसान हो जाएगा।
प्रोजेक्ट एलिफेंट के अंतर्गत एक केंद्रीय दल मध्य प्रदेश आएगा, जो असम और केरल राज्यों के अनुभवों के साथ यहां के हाथियों के झुंड के व्यवहारों का अध्ययन करेगा और उसके संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देगा। इससे हाथियों के संरक्षण पर काम किया जा सकेगा।
अर्थ-व्यवस्था आधारित गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा और वन्यजीवों के साथ जंगल का भी संरक्षण होगा।
हाथियों का आगमन
वर्ष 2018 में जंगली हाथियों ने छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश में आना शुरू किया। ये हाथी छत्तीसगढ़ के जनकपुर से मध्य प्रदेश के शहडोल और अनूपपुर के रास्ते यहां पहुंचे।
एक वर्ष में इनकी संख्या 80 हो गई थी। आज बांधवगढ़ में 70 से अधिक जंगली हाथी हैं, जो अलग-अलग झुंड में बंटे हुए हैं।

