बुलंद सोच।
देश में साइबर अपराध के मामलों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। ‘आईटी-बेईमानी-धोखा’ जैसी साइबर घटनाओं से संबंधित पीड़ितों की संख्या अधिक है।
वर्ष 2021 में साइबर क्राइम के 50035 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2024 में ऐसे मामलों की संख्या 101928 पर पहुंच गई। पांच साल में कंप्यूटर से संबंधित साइबर अपराधों की संख्या 21926 से बढ़कर 36920 हो गई है।
वर्षवार दर्ज साइबर मामलों की संख्या इस प्रकार है: 2020 में 50035, 2021 में 52974, 2022 में 65893, 2023 में 86420 और 2024 में 101928।
विभिन्न प्रकार के अपराधों में दर्ज मामलों की संख्या 2020 से 2024 तक इस प्रकार बढ़ी है: आईटी संबंधी मामले 29643 से 44872, धोखाधड़ी के मामले 10395 से 29758, बेईमानी के मामले 4480 से 19296, आईपीसी/बीएनएस संबंधी मामले 20201 से 56747 और कंप्यूटर संबंधी मामले 21926 से 36920 हो गए हैं।
सरकारी पहल और समन्वय
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई4सी) की स्थापना एक संबद्ध कार्यालय के रूप में की है।
आई4सी के एक भाग के रूप में ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (एनसीआरपी) लॉन्च किया गया है, जिसका उद्देश्य जनता को सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट करने में सक्षम बनाना है। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अंतराराष्ट्रीय वित्तीय आयोग (I4सी) के अंतर्गत ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (सीएफसीएफआरएमएस) को वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में शुरू किया गया था।
आई4सी द्वारा संचालित सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई जा चुकी है। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में सहायता के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ भी शुरू किया गया है।
वर्ष 2021 से 2025 तक, एनसीआरपी पर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों की कुल संख्या 65,89,201 से अधिक है। रिपोर्ट की गई कुल राशि 55,050 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जबकि ग्रहणाधिकार (लियन) के रूप में चिह्नित कुल राशि 8,189 करोड़ रुपये से अधिक है और पंजीकृत एफआईआर की संख्या 1,95,760 से ज्यादा है।
केंद्र सरकार द्वारा साइबर अपराध की जांच और केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए पृथक कदम उठाए गए हैं। एक समन्वय प्लेटफॉर्म को प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) प्लेटफॉर्म, डेटा भंडार और साइबर अपराध डेटा साझाकरण व विश्लेषण के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करने के लिए चालू किया गया है।
यह प्लेटफॉर्म विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराध शिकायतों में शामिल अपराधों और अपराधियों के बीच अंतरराज्यीय संबंधों का विश्लेषण-आधारित विश्लेषण प्रदान करता है। ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल अपराधियों और अपराध अवसंरचना के स्थानों को मानचित्र पर प्रदर्शित करता है, जिससे क्षेत्राधिकार अधिकारियों को जानकारी मिलती है। यह मॉड्यूल कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आई4सी और अन्य लघु एवं मध्यम उद्यमों से तकनीकी-कानूनी सहायता प्राप्त करने में भी सुविधा प्रदान करता है।
इसके परिणामस्वरूप 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और 2,33,593 से अधिक साइबर जांच सहायता अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ‘सहयोग’ पोर्टल शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी गैरकानूनी कार्य को करने के लिए उपयोग की जा रही किसी भी सूचना, डेटा या संचार लिंक तक पहुंच को हटाने या अक्षम करने में सुविधा प्रदान करना है।
साइबर अपराध के हॉटस्पॉट/बहुक्षेत्रीय मुद्दों वाले क्षेत्रों के आधार पर पूरे देश को कवर करते हुए, मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी के लिए सूचना एवं संचार नियंत्रण (आई4सी) के तहत सात संयुक्त साइबर समन्वय दल (जेसीसीटी) गठित किए गए हैं। इसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है, ताकि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय ढांचे को बढ़ाया जा सके।
क्षमता निर्माण और वित्तीय सहायता
पुलिस अधिकारियों/न्यायिक अधिकारियों की क्षमता निर्माण हेतु ‘साइट्रेन’ पोर्टल नामक विशाल मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम (एमओओसी) मंच को आई4सी के अंतर्गत विकसित किया गया है।
30 जून 2026 तक इस पोर्टल पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 1,63,344 से अधिक पुलिस अधिकारी/न्यायिक अधिकारी पंजीकृत हैं। पोर्टल के माध्यम से 1,61,957 से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।
साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त साइबर कमांडो की एक विशेष शाखा स्थापित की गई है। अब तक, 281 साइबर कमांडो को ट्रेनिंग दी गई है।
गृह मंत्रालय का आई4सी कार्यक्रम सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, क्षमता निर्माण को बढ़ाने आदि के लिए नियमित रूप से ‘स्टेट कनेक्ट’, ‘थाना कनेक्ट’ और पीयर लर्निंग सत्रों का आयोजन कर रहा है।
गृह मंत्रालय ने ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी)’ योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इस सहायता राशि में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, कनिष्ठ साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण जैसे कार्य शामिल हैं।
33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
पीड़ितों को धोखाधड़ी से हड़पी गई धनराशि की शीघ्र वापसी के लिए धन बहाली मॉड्यूल और बैंक खातों को फ्रीज करने व राशि पर गिरवी चिह्न लगाने से संबंधित शिकायतों के समय पर निपटान के लिए शिकायत निवारण मॉड्यूल अप्रैल 2026 से चालू कर दिए गए हैं।
