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2026-07-31

दतिया उपचुनाव: 30 जुलाई को मतदान, 3 अगस्त को परिणाम

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में मंगलवार शाम पांच बजे प्रचार का शोर थम गया है, जिसके बाद राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए घर-घर दस्तक अभियान में पूरी ताकत झोंक दी है। इस चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीट पर 30 जुलाई, गुरुवार को मतदान होगा, जबकि मतगणना तीन अगस्त को की जाएगी।

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यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक धोखाधड़ी के मामले में अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने और उनकी सदस्यता रद्द होने के कारण हो रहा है।

भाजपा ने इस सीट पर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देकर संघ पृष्ठभूमि से आने वाले नए चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने स्थानीय पूर्व राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले अनुभवी घनश्याम सिंह पर दांव लगाया है। सूत्रों के अनुसार, अब यह मुकाबला भाजपा में नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस के अवधेश नायक पर टिक गया है, जिनके समर्थक जोर लगाएंगे, वही ढाई वर्ष के लिए विधायक बनेगा। भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा गुरु पूर्णिमा के पूजन के लिए शहर से बाहर गए थे।

दतिया विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को 291 मतदान केंद्रों पर कुल दो लाख 20 हजार 410 मतदाताओं को ढाई साल में ही दोबारा मताधिकार का उपयोग करने का मौका मिलेगा। इनमें एक लाख 16 हजार 116 पुरुष, एक लाख चार हजार 284 महिला और 10 अन्य मतदाता शामिल हैं। पिछली बार इस सीट पर 79.26 प्रतिशत मतदान हुआ था।

भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी

भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी है और वह लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं। शिवराज सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। दतिया निवासी आशुतोष पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन्होंने पार्टी में संभागीय संगठन मंत्री सहित कई अन्य जिम्मेदारियां निभाई हैं।

उनकी मजबूती यह है कि पार्टी आलाकमान के अलावा मुख्यमंत्री सहित सरकार के सभी मंत्रीगण और विधायक चुनाव प्रचार में उतरे, जिससे बहुत जल्दी माहौल बना। वहीं, प्रदेश में भाजपा की ही सरकार होने के कारण आमजन में यह धारणा है कि अगर भाजपा का ही नुमाइंदा चुना जाता है तो सरकार का ध्यान क्षेत्र के विकास कार्यों पर रहेगा।

दतिया विधानसभा क्षेत्र में आशुतोष तिवारी का चेहरा नया है, जिससे आम मतदाताओं के बीच उन्हें पहचान बनाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता भी उन्हें नए उम्मीदवार के रूप में देख रहे हैं। पहले यहां से विधायक रह चुके नरोत्तम मिश्रा दावेदारी करते हुए जनसंपर्क शुरू कर चुके थे, लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें टिकट नहीं मिला, जिसका असर भी दिख सकता है।

कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह

कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दतिया से वर्ष 1993 और 2003 में तथा सेवढ़ा से वर्ष 2018 में विधायक बने थे। दतिया से विधानसभा चुनाव भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा से हारने के बाद उन्होंने लगातार सेवढ़ा से ही विधानसभा चुनाव लड़ा। पोस्ट ग्रेजुएट घनश्याम सिंह दतिया के पूर्व राजपरिवार से संबंध रखते हैं।

दतिया विधानसभा में वह चिर परिचित चेहरा हैं और उनकी सौम्य छवि का स्थानीय नागरिकों में प्रभाव माना जाता है। चुनाव में भी वह इसी दम पर दावेदारी पेश कर रहे हैं। भाजपा से डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कट जाने के बाद नाराज समर्थकों का साथ भी कांग्रेस को मिलने की आशा है।

कांग्रेस को भीतरघात का डर है, क्योंकि कई पार्टी नेता, प्रदेशाध्यक्ष या बड़े नेताओं के काफी दबाव के बाद नाममात्र की उपस्थिति दर्ज कराने प्रचार में उतरे हैं। भीतरघात से पार्टी को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव भी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। पूर्व राजपरिवार के कुछ सदस्य भी घनश्याम सिंह का विरोध कर रहे हैं। आमजन में “राजा और रंक की लड़ाई” की बात भी भाजपा पुरजोर तरीके से उठा रही है।