बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम से पिछले पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर खर्च की गई विभिन्न राशियों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
यह मामला कैलाश चंद अग्रवाल द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जो नगर निगम द्वारा पिछले पांच वर्षों के दौरान कराए गए सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से संबंधित है।
10 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान सिटी प्लानर सुरेश अहिरवार कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सिटी प्लानर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास कर रहे थे।
इसके बाद कोर्ट ने नगर निगम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता गौरव मिश्रा को पिछले पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने सड़क निर्माण के दौरान किए गए माप और माप पुस्तिका से संबंधित सभी रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करने को कहा है।
न्यायालय ने संकेत दिया कि सड़क निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता की जांच के लिए वह एक अधिवक्ता की अध्यक्षता में कमीशन गठित करेगा। इस कमीशन में तकनीकी टीम को भी शामिल किया जाएगा।
टीम सड़क की खोदाई कर यह जांच करेगी कि संबंधित सड़कें निर्धारित तकनीकी मापदंडों और स्वीकृत स्पेसिफिकेशंस के अनुसार बनाई गई थीं या नहीं। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कमीशन की जांच नगर निगम के किसी अधिकारी की मौजूदगी के बिना कराई जाएगी, हालांकि निगम के अधिवक्ता गौरव मिश्रा को कमीशन की कार्रवाई के दौरान उपस्थित रहकर निगम का पक्ष रखने की अनुमति दी जा सकती है।
सुनवाई के दौरान सिटी प्लानर की ओर से यह भी बताया गया कि पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा रिश्वत लेने के मामले में ट्रैप किए गए थे और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल रहा है। बताया गया कि वे वर्तमान में निलंबित हैं और उनका मुख्यालय नगर निगम ग्वालियर में है।
इस पर हाई कोर्ट ने नगर निगम के अधिवक्ता गौरव मिश्रा को प्रदीप वर्मा के खिलाफ चल रहे आपराधिक ट्रायल की प्रमाणित प्रति भी न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी।

