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2026-08-14

ग्वालियर में विद्या विहार के 60 से अधिक सर्वे नंबरों पर रजिस्ट्री और निर्माण पर रोक

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर में कलेक्ट्रेट के ठीक सामने स्थित विद्या विहार कॉलोनी के 60 से अधिक सर्वे नंबरों पर अब न तो रजिस्ट्री की जा सकेगी और न ही किसी प्रकार के निर्माण कार्य की अनुमति मिलेगी। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय द्वारा जारी स्थगन आदेश के बावजूद गुपचुप तरीके से रजिस्ट्री किए जाने की शिकायतों के बाद की गई है।
जिला प्रशासन को शिकायतें मिलने के बाद झाँसी रोड एसडीएम अतुल सिंह ने जिला पंजीयक, पंजीयन विभाग और नगर निगम को एक पत्र जारी किया है।
इस पत्र में महलगाँव स्थित विद्या विहार कॉलोनी के 60 से अधिक सर्वे नंबरों की सूची संलग्न की गई है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सिविल कोर्ट की डिक्री पर उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश (स्टे) जारी किया गया है, जिसके बावजूद रजिस्ट्री की जा रही हैं।
एसडीएम ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ ग्वालियर द्वारा जारी स्थगन आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इस पत्र के जारी होने के बाद, विवादित सर्वे नंबरों की जमीनों की रजिस्ट्री, खरीद-बिक्री और किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

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उच्च न्यायालय का स्थगन आदेश

यह पूरा मामला मध्य प्रदेश शासन बनाम नारायणी देवी व अन्य (एसए 3028/2018) से संबंधित है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में 15 मार्च 2019 को शासन के पक्ष में एक महत्वपूर्ण स्थगन आदेश जारी किया था।
इस विवाद को लेकर पूर्व में 10वें व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 ग्वालियर द्वारा 7 फरवरी 2003 को (सिविल सूट नंबर 326-ए/1992) और बाद में जिला न्यायाधीश ग्वालियर द्वारा 12 सितंबर 2018 को (नियमित सिविल अपील संख्या 34/2004) आदेश पारित किए गए थे।
इन फैसलों के खिलाफ मध्य प्रदेश शासन ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय ने अपील को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए निर्देश दिया था कि आगामी आदेश तक निचले न्यायालयों के फैसलों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर पूरी तरह से रोक रहेगी।

विवादित भूमि पर अवैध गतिविधियों की शिकायतें

झाँसी रोड एसडीएम द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, पिछले कुछ समय से विभिन्न माध्यमों और समाचार पत्रों की खबरों से यह जानकारी लगातार सामने आ रही थी कि भू-माफिया और कुछ तत्व इस विवादित सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्माण कार्य करा रहे हैं।
इसके साथ ही, आम जनता को गुमराह करके इन जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री और प्लॉटिंग की गतिविधियाँ भी धड़ल्ले से संचालित की जा रही थीं। इसी कारण प्रशासन की ओर से यह कड़ा पत्र लिखा गया है।

प्रभावित सर्वे नंबरों की सूची

जिन सर्वे नंबरों पर रोक लगाई गई है, उनमें सर्वे क्रमांक 736 (0.387 हे.), 737 (1.160 हे.), 742 (1.923 हे.), 743 (4.850 हे.), 744 (0.251 हे.), 746 (0.763 हे.), 747 (0.449 हे.), 748 (0.94 हे.), 752 (3.250 हे.), 760 (1.540 हे.), 769 (4.390 हे.) तथा 783 (3.617 हे.) शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, सर्वे क्रमांक 786, 801, 805, 810, 813 (2.602 हे.), 815 (2.456 हे.), 818, 819, 825 (1.867 हे.), 826, 827 और 836 की भूमि पर भी रोक है।
सर्वे क्रमांक 857 (2.236 हे.), 942 (2.738 हे.), 997 (1.066 हे.) तथा 1045 (1.986 हेक्टेयर) समेत कुल मिलाकर लगभग 60 से अधिक सर्वे नंबरों की भूमि को इस दायरे में रखा गया है।

अन्य विभागों को निर्देश

इस पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर ग्वालियर को सूचनार्थ भेजने के साथ-साथ आयुक्त नगर पालिक निगम ग्वालियर और संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश ग्वालियर को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
नगर निगम आयुक्त से विशेष अनुरोध किया गया है कि उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय आने तक इन विवादित सर्वे क्रमांकों पर किसी भी प्रकार के भवन निर्माण की अनुमति या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों संबंधी अनुज्ञा जारी न की जाए।
यह भी कहा गया है कि यदि कोई आवेदन आता भी है, तो पहले कानून के दायरे में उसकी गहनता से जाँच की जाए।

एसडीएम का बयान

झाँसी रोड के एसडीएम अतुल सिंह ने बताया कि विद्या विहार कॉलोनी के सर्वे नंबरों पर रजिस्ट्री न करने व निर्माण अनुमति न दिए जाने को लेकर पंजीयन विभाग व नगर निगम को पत्र लिखा गया है। उन्होंने पुष्टि की कि इस भूमि पर उच्च न्यायालय ने स्थगन जारी किया है और यहाँ रजिस्ट्री व निर्माण की शिकायतें मिली हैं।