बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर में 91 वर्षीय गीता चौहान को 19 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार अपने ही फ्लैट का कब्जा वापस मिल गया है।
उन्होंने अपने लकवाग्रस्त और गंभीर बीमार बेटे की देखभाल के लिए ज्योति पांजरे नामक केयरटेकर को रखा था।
केयरटेकर ज्योति पांजरे ने उन्हें डरा-धमकाकर घर से बेदखल कर दिया था और फर्जी विवाह प्रमाण-पत्र भी बनवा लिया था ताकि फ्लैट पर मालिकाना हक साबित कर सके।
इस घटना के कारण बुजुर्ग मां और उनके 71 वर्षीय बेटे को सालों तक किराए के मकान में भटकना पड़ा।
अधिवक्ता मनोज शर्मा और ईशा शर्मा ने गीता चौहान का प्रतिनिधित्व किया और मामला वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 के तहत एसडीएम न्यायालय, जूनी इंदौर पहुंचा।
न्यायालय ने मालिकाना हक गीता चौहान का पाया, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में बेदखली की कार्रवाई कर उन्हें फ्लैट का कब्जा वापस दिलाया गया।
बेटे त्रिलोक चौहान का बयान
71 वर्षीय बेटे त्रिलोक चौहान ने बताया कि केयरटेकर महिला ने कुछ दिनों बाद ही उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया था।
उन्होंने बताया कि महिला कभी उनकी मां को धमकाते हुए कहती थी कि वह उन दोनों को जहर दे देगी, तो कभी उन्हें कहती कि वह उनके गले पर पांव रखकर मार देगी और घर में घासलेट डालकर जला देगी।
त्रिलोक चौहान ने आगे बताया कि वह बिस्तर से उठ नहीं सकते थे और यदि कभी बिस्तर से गिर जाते थे तो उन्हें डायल 100 पर कॉल करके पुलिस बुलानी पड़ती थी, क्योंकि बुजुर्ग मां उन्हें उठा नहीं सकती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि वे इतने डर गए थे कि फिर उन्होंने कभी किसी को केयरटेकर के रूप में नहीं रखा।
प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध की स्थिति
यह घटना राज्य की उस चिंताजनक स्थिति को भी दर्शाती है, जहां एनसीआरबी (NCRB) के अनुसार मध्य प्रदेश लगातार तीसरे वर्ष वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध में देश में पहले स्थान पर है।
वर्ष 2024 में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े अपराधों के 5,875 मामले दर्ज हुए हैं।
वर्ष 2022 से 2024 की अवधि में कुल 17,800 से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं।
वर्ष 2023 में अकेले इंदौर में ही वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध के 273 मामले दर्ज हुए हैं।
ठगी के तरीके
ठग वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर निशाना बनाते हैं।
बैंक और मोबाइल के केवाईसी (KYC) अपडेट के नाम पर भी धोखाधड़ी की जाती है।
निवेश पर ज्यादा मुनाफे का लालच देकर तथा ओटीपी (OTP) और स्क्रीन शेयरिंग के माध्यम से भी ठगी की जाती है।
इसके अतिरिक्त, परिचित बनकर विश्वास जीतना और भावनात्मक व कानूनी धोखाधड़ी भी ठगी के तरीकों में शामिल हैं।

