बुलंद सोच, इंदौर।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सैमिल ने अपने बेटे-बहू और रिश्तेदारों के नाम पर ट्रांसफार्मर निर्माण की कई इकाइयां स्थापित कर रखी थीं। आरोप है कि प्रभाव का इस्तेमाल कर इन्हीं फर्मों को बिजली कंपनी में ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग और संबंधित कार्यों के ठेके भी दिलवाए जाते थे।
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेश सहाय की अनु जांच में शुभम इलेक्ट्रिकल, कर्निश पावरजोन, एसएस इलेक्ट्रिकल्स, कृष्णा पावर और ए-वन इलेक्ट्रिकल के नाम से संचालित इकाइयों के दस्तावेज मिले हैं। इन फर्मों के माध्यम से ट्रांसफार्मर निर्माण और मरम्मत का कारोबार किया जा रहा था।
डीएसपी सुनील तालान के नेतृत्व में पीथमपुर स्थित फैक्ट्रियों की तलाशी के दौरान कर्मचारियों ने पूछताछ में बताया कि दस्तावेज भले ही परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर हैं, लेकिन पूरे कारोबार का संचालन शिवराम सैमिल के पुत्र सौरभ सैमिल द्वारा किया जाता है।
लोकायुक्त अब इन फर्मों की हिस्सेदारी, पूंजी निवेश और सरकारी ठेकों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि सैमिल के दामाद सुनील इंडोलिया, जो स्वयं बिजली कंपनी में सब इंजीनियर हैं, से जुड़े संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी मिले हैं।
लोकायुक्त अब उनकी चल-अचल संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इनमें निवेश का स्रोत क्या है और उसका मुख्य आरोपी से कोई संबंध है या नहीं।
मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी पर लोकायुक्त की कार्रवाई
मध्य प्रदेश में सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई से लगाया जा सकता है।
वर्ष 2026 के पहले छह माह में लोकायुक्त ने 33 ट्रैप और भ्रष्टाचार के प्रकरण दर्ज किए, यानी औसतन हर पांचवें दिन एक अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगते या लेते हुए कानून के शिकंजे में फंसा।
सबसे अधिक कार्रवाई राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर हुई, जहां पटवारियों के खिलाफ लगातार ट्रैप हुए। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), पुलिस, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, सहकारिता और नगर प्रशासन विभाग के अधिकारी भी लोकायुक्त के रडार पर रहे।
रिश्वत की रकम पांच हजार रुपये से लेकर तीन लाख रुपये तक रही। कई मामलों में भुगतान, नामांतरण, सीमांकन, निर्माण कार्यों के बिल, पंचायत भुगतान, आवास योजना, शिक्षक नियुक्ति और पुलिस प्रकरणों में राहत दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगी गई।
वर्ष की सबसे बड़ी ट्रैप कार्रवाई इंदौर में लोक निर्माण विभाग में हुई, जहां ठेकेदार के लंबित बिल जारी करने के एवज में तीन अधिकारियों जयदेव गौतम, टीके जैन और अंशु दुबे द्वारा कुल तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगने का मामला सामने आया। लोकायुक्त ने कार्रवाई कर आरोपितों को रंगे हाथ पकड़ लिया।
धार जिले में भी कई अधिकारी कार्रवाई की जद में आए। वहीं इंदौर, खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, खंडवा और अन्य जिलों में भी लगातार ट्रैप की कार्रवाई हुई।
कुछ मामलों में रिश्वत का लेन-देन नहीं हो सका, लेकिन शिकायत और साक्ष्य के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किए गए।
